रिपोर्ट:मोहित जौहरी, महेश शर्मा
पीलीभीत। वक्फ की जमीन पर वर्षों पुराने आम के बाग को काटे जाने की सूचना पर प्रशानिक अफसरों में खलबली मच गई। शासकीय हित के प्रति उदासीन अधिकारियों की लापरवाही के कारण कई दिन पूर्व हुई लिखित शिकायत के बाद भी वक्फ की जमीन पर खड़े आम के बाग को उजाड़ दिया गया। मामले की सूचना पर शहर की मीडिया सहित राजस्व विभाग से राजस्व निरीक्षक, लेखपाल और विनियमित क्षेत्र के अवर अभियंता सहित वक्फ बोर्ड के कर्मचारी भी मौके पर पहुंच गए। घंटेभर तक चली जद्दोजहद के बाद बाग में खड़े पेड़ों के कटान को रुकवा दिया गया। दरअसल वक्फ बोर्ड और राजस्व विभाग के तत्कालीन अधिकारियों ने अपनी भ्रष्टता का परिचय देते हुए वक्फ की संपत्तियों को अपने चहेते लोगों के नाम दर्ज कराने में अहम भूमिका निभाई है,जिसके कारण चुनिंदा जमीन कारोबारी वक्फ की जमीनों पर हांथ साफ करके फर्श से अर्श पर पहुंच गए हैं।
विदित हो कि तहसील पीलीभीत क्षेत्र के ग्राम देशनगर अन्दर चुंगी स्थित गाटा सं0 1206 रकबा 0.4130 हे0, गाटा संख्या 1207 रकवा 0.4500 हे0, गाटा सं0 1208 रकवा 0.7210 हे0 जोकि वक्फ अलल औलाद अलानफस अभिलेखो में दर्ज है। वक्फ की जमीन में वर्षों पुराना हरा भरा आम का वाग है। गाटा संख्या1202/3/1 रकवा 0.1532 हे0 को वक्फ बोर्ड एवं राजस्व विभाग के भ्रष्ट अधिकारियों की सांठगांठ से शहर के मोहल्ला मो0 बासिल निवासी एक शातिर व्यक्ति द्वारा अपने नाम दर्ज करा लिया गया है। बीते दिनों सूबे के मुखिया योगी आदित्यनाथ को भेजे गए शिकायती पत्र में बताया गया कि वक्फ की जमीन बेचने के लिए शाहरूखनूर, सलमाननूर पुत्रगण, अशरफनूर, नसरीन बी पत्नी स्व0 अशरफनूर निवासी मो0 मोहम्मद वासिल ने 30 मई 2023 को सतीश कुमार, हेतराम व अहमद नवी के हक में रजिस्टर्ड इकरारनामा करा दिया है और 31 मई 2025 तक बैनामा कराने का समय निर्धारित किया गया है। शिकायत में यह भी आरोप लगाया गया है कि बिना सीमांकन के जमीन कारोबारी वक्फ की जमीन को नाजायज तरीके से हड़पने का लगातार प्रयास कर रहे हैं। शिकायत प्राप्त होने के बाद भी अधिकारी उदासीन बने रहे। नतीजन वक्फ की जमीन पर कब्जा करने के लिए हरियाली के कातिलों ने वक्फ की जमीन पर खड़ा हरा भरा फलदार आम का बाग उजाड़ दिया। वक्फ की जमीन पर लगा बाग प्रस्तावित महायोजना 2031 में दर्ज है। बाग में खड़े पेड़ों को काटने की अनुमति सामाजिक वानिकी प्रभाग के प्रभागीय निदेशक द्वारा भी नही दी जानी चाहिए थी,लेकिन उद्यान विभाग की तथहीन निरीक्षण आख्या के आधार मिलीभगत करके दी गई। फिलहाल अधिकारियों की उदासीनता कहें या मिलीभगत कि एक बार फिर वक्फ का बड़ा भू भाग जमीन कारोबारियों और भ्रष्ट अफसरों की भेंट चढ़ने की तैयारी में है।
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