बरेली ।रबर फैक्ट्री बन्द होने से बेरोजगार हुए मजदूर अपनें हक़ के लिये एक बार फिर आगे आए हैं। मज़दूरों की बैठकों का दौर जारी है। जुलाई 1999 में बंद हुई रबर फैक्ट्री से हजारों घरों के चूल्हे बुझ गए थे। इसके बाद कर्मचारियों को सिर्फ आस रह गई थी। कर्मचारियों की उम्मीद जिला प्रशासन और श्रम विभाग समेत कर्मचारी भविष्य निधि विभाग ने भी कोई मदद नहीं की। उस वक्त के नेताओं से भी कोई मदद नहीं मिली अभी तब कर्मचारियों ने अपने हक की लड़ाई शुरू की। कर्मचारी नेता अशोक मिश्रा ने इसकी कमान संभाली। अशोक मिश्रा ने लम्बे समय से लड़ी जा रही लड़ाई के फैसले को मजदूरों की जीत बताया। उन्होंने कहा हम लगातार शासन और प्रशासन को मजदूरों की समस्या और उनके वैधानिजिस पर अब फैसला आया है भुगतानों पर अवगत कराते रहें हैं। 23 साल से आर्थिक तंगी, भुखमरी, बेरोजगारी, बीमारी जैसी समस्याओं से जूझते हुए 600 से अधिक कर्मचारी समय से पहले मृत्यु को प्राप्त हो गये है।
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