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लेखपालों पर मेहरबान अधिकारियो ने अवैध लाभ देकर सरकारी खजाने का बढ़ाया बोझ।

  • ऑडिट में खुली अनियमितताएं

बरेली । ऑडिट टीम की जांच में सदर तहसील में बड़े पैमाने पर वित्तीय गड़बड़ियां पकड़ी गई हैं। ऑडिट रिपोर्ट के मुताबिक अफसरों ने पिछले तीन साल में नियम-कायदों को ताक पर रखकर लेखपालों को जमकर नाजायज लाभ पहुंचाया। अवैध रूप से आवास और यात्रा भत्ता देने के साथ वेतनवृद्धि तक देकर सरकारी खजाने पर लाखों का बोझ बढ़ा दिया गया। अब तक लगातार चल रहे इस खेल के उजागर होने के बाद राजस्व परिषद के अपर आयुक्त वित्त शिवधनी सिंह यादव ने लेखपालों को अवैध रूप से दी गई धनराशि की वसूली करने का आदेश दिया है।
राजस्व परिषद की ओर से सदर तहसील को भेजी गई रिपोर्ट के मुताबिक ऑडिट टीम के वर्ष 2022-23 की बिल बुक की जांच करने पर इन गड़बड़ियों का खुलासा हुआ है। इसमें पता चला कि 52 लेखपालों को शहरी क्षेत्र के आवास भत्ते के साथ नियत यात्रा भत्ते का भी भुगतान किया जा रहा है, जबकि दोनों भत्ते एक साथ देय नहीं है। अफसरों को इन सभी लेखपालों को दिए गए यात्रा भत्ते की धनराशि की वसूली करने का निर्देश दिया गया है। प्रत्येक लेखपाल से 1200 -1200 रुपये के हिसाब से 1.24 लाख की वसूली कर राजकोष में जमा की जानी है।
ऑडिट टीम की रिपोर्ट एसडीएम सदर, तहसीलदार सदर के साथ आयुक्त एवं सचिव राजस्व परिषद और डीएम को भी भेजी है और वित्तीय अनियमितताओं का संज्ञान लेने को कहा है। अपर आयुक्त वित्त ने तहसीलदार सदर को निर्देश दिया है कि निरीक्षण पत्र जारी होने के दो महीने के अंदर अनुपालन सुनिश्चित किया जाए और इसकी रिपोर्ट डीएम के जरिए अपर आयुक्त वित्त कार्यालय को भेजी जाएगी।
चिकित्सा अवकाश के दौरान भी यात्रा भत्ता और स्टेशनरी का पैसा
ऑडिट टीम ने बिल बुक की जांच में पाया कि लेखपाल महेंद्र पाल दो मई 2022 से 31 मई 2022 तक चिकित्सा अवकाश पर थे। इस अवधि के वेतन का ही उन्हें भुगतान नहीं किया गया बल्कि यात्रा भत्ता और स्टेशनरी के लिए पैसों का भी भुगतान किया गया है। महेंद्रपाल से यह पूरी रकम वसूल कर जमाकोष में जमा कराने को कहा गया है।
शासनादेश की अनदेखी करके दे दी वेतन वृद्धि
लेखपाल भूषित की सेवापुस्तिका की जांच से पता चला कि उनकी नियुक्ति 16 फरवरी 2008 को हुई थी। उन्हें प्रथम एसीपी 16 फरवरी 2018 को ग्रेड वेतन 2000 में प्राप्त वेतन 29300 रुपये से ग्रेड वेतन 2400 में निर्धारित करने पर 30500 रुपये निर्धारित की गई। फिर एक मार्च 2018 से 31400 रुपये निर्धारित की गई जो त्रुटिपूर्ण है। दस वर्ष पर एसीपी में 16 फरवरी 2018 को विकल्प के आधार पर 22 दिसंबर 2016 और 13 अप्रैल 2020 को जारी शासनादेश के तहत छह माह का अंतर दोनों वेतन वृद्धियों में होना अनिवार्य है। इससे अधिक वेतन भुगतान वसूली योग्य है। निर्देश दिया गया है कि अधिक वेतन भुगतान और महंगाई भत्ते का परीक्षण कराकर अतिरिक्त धनराशि कोष में जमा कराई जाए। ऑडिट टीम से इसका सत्यापन भी कराया जाए।
आयकर कटौती किए बगैर दे दिया वेतन
जांच में यह भी पाया गया कि लेखपाल गोपाल प्रसाद, उस्मान रजा, नरेंद्र चंद्र, निर्दोष कुमार और राजेश कुमार, शिवशंकर लाल, चतुर बिहारी लाल और सौरभ कुमार के वेतन से अग्रिम तौर पर आयकर की कटौती नहीं की जा रही है। वित्तीय वर्ष 2023-24 से आयकरदाता लेखपालों से आयकर कटौती करने का निर्देश दिया गया है। 17 लेखपालों की सेवापुस्तिका का बिल बुक से सत्यापन भी पांच साल से न कराए जाने की पुष्टि हुई है। ऑडिट टीम से इसका सत्यापन कराने के निर्देश दिए गए हैं।

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