पीलीभीत। जिलाधिकारी ज्ञानेन्द्र सिंह ने मंगलवार को गांधी सभागार से पराली न जलाने के लिए जनजागरूकता प्रचार वाहन को हरी झंडी दिखाकर रवाना किया। इस अवसर पर उन्होंने किसानों से अपील की कि वे पराली को जलाने के बजाय जैविक खाद या पशु चारे के रूप में उपयोग करें ताकि मिट्टी की उर्वरकता बनी रहे और प्रदूषण पर नियंत्रण पाया जा सके।
जिलाधिकारी ने कहा कि पराली जलाने से पर्यावरण प्रदूषण, मिट्टी की गुणवत्ता में गिरावट और जनस्वास्थ्य पर बुरा प्रभाव पड़ता है। इसलिए किसान भाई आधुनिक तकनीक और सरकारी योजनाओं का लाभ लेकर पराली प्रबंधन करें।
उप कृषि निदेशक इंजीनियर कौशल किशोर ने बताया कि पराली प्रबंधन हेतु सुपर एसएमएस, स्ट्रा रेक, बेलर, मल्चर, पैडी स्ट्रा चॉपर, श्रब मास्टर, रोटरी स्लेशर, रिवर्सिबल एमबी प्लाऊ जैसे उपकरणों का प्रयोग किया जाए ताकि फसल अवशेषों को मिट्टी में मिलाया जा सके या अन्य उपयोग में लाया जा सके।
उन्होंने बताया कि यदि कोई किसान बिना पराली हटाए जीरो टिल सीड कम फर्टी ड्रिल, हैपी सीडर या सुपर सीडर का प्रयोग कर सीधे बुवाई करना चाहता है तो उसे इस संबंध में घोषणापत्र संबंधित कृषि अधिकारी को देना होगा कि वह पराली नहीं जलाएगा।
पराली जलाने पर हुई कार्रवाई:-
वर्ष 2023 में पराली जलाने पर जिले के 75 किसानों से ₹2,10,000 और वर्ष 2024 में 18 किसानों से ₹72,500 अर्थदंड वसूला गया।
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