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पीलीभीत:UGC गाइडलाइन के विरोध में सवर्ण समाज का प्रदर्शन, अधिसूचना को बताया ‘काला कानून’

पीलीभीत। विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (UGC) द्वारा जनवरी 2026 में जारी नई गाइडलाइन के विरोध में पीलीभीत में सवर्ण समाज का आक्रोश खुलकर सामने आया। बुधवार को शहर के नकटा दाना चौराहे पर बड़ी संख्या में लोग एकत्र हुए और सरकार के खिलाफ जोरदार नारेबाजी करते हुए अधिसूचना को तत्काल वापस लेने की मांग की।

प्रदर्शन के दौरान लोगों के हाथों में तख्तियां और बैनर थे, जिन पर “काला कानून वापस लो” और “समानता के अधिकार से समझौता बंद करो” जैसे नारे लिखे थे। कई प्रदर्शनकारियों ने बांहों पर काली पट्टी बांधकर और काला टीका लगाकर विरोध दर्ज कराया। उनका कहना था कि UGC की यह गाइडलाइन संविधान में प्रदत्त समानता के अधिकारों के विपरीत है और सामान्य वर्ग के हितों को प्रभावित करती है।

मुंडन कराकर जताया विरोध


आंदोलन के दौरान ब्राह्मण समाज के निर्मल कांत शुक्ला और हरिओम वाजपेई ने मुंडन कराकर सरकार की नीतियों के प्रति विरोध जताया। उन्होंने कहा कि यह कदम उनके असंतोष और त्याग का प्रतीक है तथा जब तक यह अधिसूचना वापस नहीं ली जाती, तब तक आंदोलन जारी रहेगा।

इस्तीफे के मुद्दे से आंदोलन को मिली धार
प्रदर्शन में बरेली के सिटी मजिस्ट्रेट अलंकार अग्निहोत्री के इस्तीफे का मुद्दा भी प्रमुखता से उठाया गया। प्रदर्शनकारियों का कहना था कि UGC के नए नियमों से शैक्षणिक वातावरण में असंतोष और भय की स्थिति बन रही है।

अधिवक्ताओं ने दिया समर्थन
स्थानीय अधिवक्ताओं के एक समूह ने भी मौके पर पहुंचकर आंदोलन का समर्थन किया। उन्होंने कहा कि किसी भी नीति का उद्देश्य सभी वर्गों को समान न्याय और अवसर देना होना चाहिए।

सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम
स्थिति को देखते हुए प्रशासन ने मौके पर भारी पुलिस बल तैनात किया था, जिससे किसी भी अप्रिय घटना को रोका जा सके।

राष्ट्रपति के नाम सौंपा ज्ञापन
प्रदर्शन के बाद समाज के प्रतिनिधियों ने कलेक्ट्रेट पहुंचकर जिलाधिकारी के माध्यम से राष्ट्रपति के नाम ज्ञापन सौंपा।
ज्ञापन में कहा गया कि UGC की अधिसूचना एकतरफा है और इसके दुरुपयोग की आशंका से इनकार नहीं किया जा सकता। साथ ही मांग की गई कि सभी वर्गों के छात्रों के हितों को ध्यान में रखते हुए संतुलित और संविधानसम्मत नीति बनाई जाए।

प्रदर्शनकारियों ने चेतावनी दी कि यदि मांगों पर ध्यान नहीं दिया गया, तो सवर्ण समाज अपना आंदोलन लोकतांत्रिक तरीके से और व्यापक करेगा।

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