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स्मार्ट मीटर या ‘सफेद हाथी’? बिजली बिल भरने के बाद भी अंधेरे में जनता, UPPCL की लचर व्यवस्था से त्राहिमाम!

पीलीभीत:उत्तर प्रदेश में स्मार्ट मीटर उपभोक्ताओं के लिए ‘वरदान’ नहीं बल्कि ‘जी का जंजाल’ बन गए हैं। पूरे प्रदेश से ऐसी खबरें आ रही हैं जहाँ जनता समय पर बिल भुगतान करने के बावजूद बिजली कटौती और तकनीकी खामियों की दोहरी मार झेल रही है। ‘डिजिटल इंडिया’ का दम भरने वाला विभाग अब जनता के आक्रोश का केंद्र बन चुका है। पीलीभीत जिले में भी रोज जनता में आक्रोश देखा जा रहा है।

पैसा जमा, फिर भी बत्ती गुल: जनता का दर्द
हैरानी की बात यह है कि उपभोक्ता हजारों रुपये का बिल ऑनलाइन या काउंटर पर जमा कर रहे हैं, लेकिन उनकी बिजली आपूर्ति बहाल नहीं हो रही। उपभोक्ताओं का गंभीर आरोप है कि बिल भरने के बाद भी UPPCL द्वारा भेजे गए मैसेज में ‘पोस्टपेड’ और ‘प्रीपेड’ दोनों बैलेंस नेगेटिव दिखाए जा रहे हैं। जनता का सवाल सीधा है— जब पैसा कट गया, तो मीटर में क्रेडिट क्यों नहीं हुआ?

दोहरी व्यवस्था का चक्रव्यूह: आधा शहर प्रीपेड, आधा पोस्टपेड
बिजली विभाग की कार्यप्रणाली पर सबसे बड़ा सवाल यह है कि एक ही शहर में दो समानांतर व्यवस्थाएं क्यों चल रही हैं? नियमतः प्रीपेड व्यवस्था तब तक पूरी तरह लागू नहीं होनी चाहिए थी, जब तक सभी कनेक्शनों को अपग्रेड न कर लिया जाए। इस ‘खिचड़ी व्यवस्था’ के कारण बिलिंग सॉफ्टवेयर में भारी गड़बड़ियाँ आ रही हैं, जिसका खामियाजा आम आदमी भुगत रहा है।

लापरवाही की इंतहा: न फोन उठता है, न समाधान मिलता है
जनता की नाराजगी सिर्फ तकनीकी खराबी तक सीमित नहीं है। आरोप है कि समस्या आने पर न तो बिजली विभाग के अधिकारी जिम्मेदारी लेते हैं और न ही स्मार्ट मीटर लगाने वाली निजी कंपनियों के कर्मचारी। हेल्पलाइन नंबर शोपीस बनकर रह गए हैं और दफ्तरों में तैनात मुलाजिमों के पास जनता की फरियाद सुनने की फुर्सत नहीं है।

सरकार की चुप्पी और बढ़ता जनाक्रोश
जिले-जिले में लोग सड़कों पर उतरने को मजबूर हैं, लेकिन शासन-प्रशासन की चुप्पी हैरान करने वाली है। बिजली कटौती और गलत बिलिंग ने व्यापार से लेकर बच्चों की पढ़ाई तक सब चौपट कर दिया है। सवाल यह उठता है कि क्या सरकार और विभाग को जनता की इस ‘त्राहिमाम’ सुनाई नहीं दे रही?

अधिकारियों ने क्या कहा

अधिकारियों ने स्पष्ट कहा कि यह कटौती ऊपर से ही सिस्टम द्वारा की गई है। अधिकारियों के मुताबिक, जिन उपभोक्ताओं का बकाया बहुत अधिक हो गया है और जिन्होंने महीनों से भुगतान नहीं किया है, उनकी बिजली तब तक बहाल नहीं होगी जब तक वे अपना पिछला एरियर (बकाया) जमा करके बैलेंस को ठीक नहीं कर लेते।

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