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पीलीभीत। शंकराचार्य परंपरा के संन्यासी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती महाराज द्वारा आगामी 1 जुलाई 2026 को पीलीभीत में निकाली जाने वाली ‘गौ-रक्षार्थ धर्म युद्ध यात्रा’ को लेकर विवाद खड़ा हो गया है। नाथ संप्रदाय के स्थानीय प्रतिनिधि ने एक प्रेस नोट जारी कर इस यात्रा पर तीखा प्रहार किया है और इसे पूरी तरह से विभाजनकारी तथा राजनीतिक महत्वाकांक्षाओं को पूरा करने का जरिया बताया है। उन्होंने स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद को गौ-संरक्षण के विषय पर तथ्यों के आधार पर खुली शास्त्र चर्चा की चुनौती दी है।
साधु भेष में समाज को ठेस पहुंचाने का आरोप प्रेस नोट में कहा गया है कि वर्तमान समय में साधु समाज के भेष और परिवेश में कुछ ऐसे लोग सक्रिय हो गए हैं, जो असामाजिक और अधार्मिक भावनाओं से ग्रसित हैं। आरोप लगाया गया है कि इन लोगों द्वारा सनातन समाज के सम्मान को ठेस पहुंचाने वाले कार्य किए जा रहे हैं। जारी बयान के अनुसार, स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती विगत डेढ़ वर्षों से लगातार इसी प्रकार की गतिविधियों में संलिप्त हैं।
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के अपमान पर नाराजगी प्रेस नोट में अत्यंत प्राचीन ‘गोरक्ष नाथ संप्रदाय’ के सर्वोच्च पीठाधीश्वर और उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ महाराज के प्रति गहरी आस्था व्यक्त की गई है। इसमें आरोप लगाया गया है कि स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद व्यक्तिगत द्वेष भावना से प्रेरित होकर मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के खिलाफ अनुचित शब्दों का प्रयोग कर रहे हैं, जिससे नाथ संप्रदाय की पावन परंपरा और उसे मानने वाले करोड़ों श्रद्धालुओं के हृदय को गहरा आघात पहुंचा है।
सनातन धर्म की गरिमा को ठेस पहुंचाने की कोशिश नाथ संप्रदाय के प्रतिनिधि ने कहा कि सनातन धर्म की परंपरा में कभी भी किसी आचार्य द्वारा दूसरे आचार्य के प्रति असम्मानजनक व्यवहार करने का इतिहास नहीं रहा है। आज गोरक्ष पीठाधीश्वर महंत योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में पूरे विश्व में सनातन धर्म का परचम लहरा रहा है, लेकिन कुछ लोग इस गरिमा को ठेस पहुंचाने की नीयत से काम कर रहे हैं। नाथ संप्रदाय का प्रतिनिधि होने के नाते ऐसी विध्वंशकारी हरकतों को चुनौती देना उनकी नैतिक जिम्मेदारी है।
’चुनौती स्वीकार करें या पीलीभीत में बिना घुसे वापस लौट जाएं’ प्रेस नोट के माध्यम से स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती को स्पष्ट चेतावनी दी गई है कि या तो वे गौ-संरक्षण के मुद्दे पर सरकार के पिछले 9 वर्षों के कार्यों और उससे पहले (9 साल पहले) की गोवंश की स्थिति पर तथ्यों के साथ शास्त्र चर्चा की चुनौती स्वीकार करें, अथवा अपनी हार मानकर पीलीभीत जनपद में प्रवेश किए बिना ही वापस लौट जाएं।
आयोजकों से यात्रा का खंडन करने की अपील इसके साथ ही, पीलीभीत जनपद में इस यात्रा के आयोजकों से भी अपील की गई है कि वे इस ‘धर्म द्रोही और धर्म विरोधी’ यात्रा का खंडन करें। प्रतिनिधि ने कहा कि यदि आयोजकों को फिर भी लगता है कि यह यात्रा जरूरी है, तो वे प्रेस वार्ता में आएं और तथ्यों के साथ यह सिद्ध करके दिखाएं कि आखिर इस यात्रा की आवश्यकता क्यों है।
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