पीलीभीत। श्री रामलीला महोत्सव संचालन समिति के तत्वावधान में रविवार, 11 अक्टूबर को स्थानीय परमठ मंदिर पर ‘श्री राम वन गमन’ लीला का सजीव व मनमोहक मंचन किया गया। ऐतिहासिक घन्नई तालाब पर राम-केवट संवाद देखने के लिए हजारों की संख्या में श्रद्धालु उमड़ पड़े। वनवास के दृश्य और प्रभु राम की विदाई को देखकर वहां उपस्थित सभी भक्तगण भाव-विह्वल हो उठे।
मंथरा की कुटिल चाल और कैकेयी का वरदान
लीला की शुरुआत में दिखाया गया कि श्री राम विवाह के बाद भरत और शत्रुघ्न अपने ननिहाल प्रस्थान करते हैं। इसके बाद राजकाज से थक चुके महाराज दशरथ कुलगुरु वशिष्ठ से राम के राज्याभिषेक की इच्छा जताते हैं, जिससे पूरी अयोध्या में खुशी की लहर दौड़ जाती है। लेकिन दासी मंथरा की कुटिल चालों में आकर रानी कैकेयी महाराज दशरथ से अपने दो वरदान मांग लेती हैं भरत का राज्याभिषेक और राम को 14 वर्ष का वनवास। यह सुनते ही महाराज बदहवास होकर गिर पड़ते हैं। पिता के वचन की खातिर प्रभु राम, लक्ष्मण और सीता वनवासी वस्त्र धारण कर वन की ओर प्रस्थान करते हैं।
ऐतिहासिक घन्नई लीला और चित्रकूट विश्राम
घन्नई तालाब (एकता सरोवर) पर केवट प्रसंग का सजीव मंचन किया गया, जहां प्रभु राम ने केवट की सहायता से नाव पार की। इसके बाद प्रभु राम, लक्ष्मण और सीता पैदल ही लक्ष्मणगढ़ी, दूधिया मंदिर, लेखराज चौराहा, काला मंदिर, नई बस्ती चौराहा और रामा कॉलेज होते हुए माल गोदाम रोड (प्लॉट नं. 772) स्थित ‘चित्रकूट विश्राम स्थल’ पहुंचे। लेखराज चौराहे से नई बस्ती तक जिन पर्णद्वारों और दीपद्वारों को राम के राज्याभिषेक के लिए सजाया गया था, उन्हीं से होकर जब प्रभु वन की ओर गुजरे तो दृश्य अत्यंत मार्मिक हो गया।
लीला का कुशल संचालन संजय पांडेय ने किया, जबकि रामायणी निशांत तिवारी और अंकुर मिश्रा ने रामचरितमानस की चौपाइयों का सुमधुर गायन कर पूरे माहौल को राममय बना दिया।
इस अवसर पर महंत ओमकार नाथ, सुनील मिश्रा, राकेश लोधी, अमरीश शर्मा अंबू, प्रेम सिंह, नरेश शुक्ला, आयुष सक्सेना, भीम सिंह चौहान, प्रतीक अग्रवाल टिन्नी, संजीव मिश्रा, संजीव चौहान, संजीव शर्मा, अवनीश शर्मा, संजीव मोहन अग्रवाल, अंशुमान मिश्र, विकास और सुधीर पाल सिंह, अमिताभ त्रिपाठी, संजय सक्सेना, अम्बरीश मिश्रा, अमित जौहरी, आकाश कश्यप, प्रदीप शर्मा, हिमांशु कश्यप, विनीत शर्मा, सोमनाथ सप्रे, पुनीत व नितिन शर्मा, अभिषेक, वरुण शुक्ला, अश्वनी उपाध्याय, अरुण सक्सेना और ध्रुव गौड़ सहित बड़ी संख्या में समिति के पदाधिकारी व भक्तगण उपस्थित रहे।