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तो क्या शव का इलाज करने वाले डॉ की डिग्री सही हैं साहब ,जो अभी तक कोई कार्यवाही नहीं हुई ?

मोहित जौहरी@ express views ।पीलीभीत । शव का वेंटीलेटर पर इलाज करने वाले डॉक्टर योगेंद्र नाथ की शिकायत भले ही मरीज के घर वालों ने वापस ले ली हो और कोई कार्यवाई न करने की बात की हो लेकिन जनता में सुगबुगाहट है कि आखिर एक डॉक्टर जिसने मानवता की सारी हदें पार कर दीं। महज चंद रुपयों के लिए एक लाश को अपने अस्पताल में भर्ती किया हो और जिसकी डिग्री भी जांच में फ़र्ज़ी पाई गयी है । उसके खिलाफ प्रशासन ने अभी तक करवाई क्यों नहीं की है ? क्या डॉ योगेंद्र ने जो किया वो सही था ? क्या डॉ की डिग्री फर्जी नहीं थी । मांमले को 1पखवाड़ा बीतने को है जनता के बीच ये ही सवाल लगातार उठ रहे हैं कि ये प्रशासन की नाकामी है या कुछ और ?

ज्ञात हो कि पीलीभीत जिले के पूरनपुर तहसील के सिकराना गांव के निवासी राजू को उसके घरवाले घायल अवस्था में ७ जून २०१९ को उत्तर प्रदेश के पीलीभीत जिले के मैकूलाल वीरेंद्र नाथ अस्पताल लेकर पहुंचे । जहां डॉक्टरों ने पहले एग्रीमेंट पेपर पर दस्तखत करवा लिए । और मरीज़ की हालत गंभीर बताते हुए ४० हजार रूपए तत्काल जमा करवाते हुए मरीज को आई सी यू विभाग में वेंटिलेटर पर रखवा दिया । मृतक की पत्नी शारदा देवी ने जिलाधिकारी को लिखे पत्र में जानकारी दी कि आई सी यू में भर्ती करने के बाद उनसे ६० हजार रूपए और जमा कराये गए ।
अगले ही दिन सुबह जब परिवारवालों ने राजू को घर ले जाने कि बात कि तो डॉ.योगेंद्र नाथ मिश्रा ने मरीज कि हालत को गंभीर बताते हुए ७२ घंटे से पहले छुट्टी करने से इंकार कर दिया । परिजनों को किसी अनजान भय कि शंका हुयी तब उन्होंने अस्पताल प्रशासन पर मरीज की स्तिथि जानने का प्रयास किया, जिस पर अस्पताल प्रशासन अपनी गर्दन फंसती देख उसको किसी अन्य अस्पताल में रेफर कर दिया ।वहीँ दम तोड़ चुके राजू के घर वालों ने जब पोस्टमार्टम करवाया तब पोस्टमार्टम रिपोर्ट में हुए खुलासे को देख सभी हैरान रह गए । पोस्टमार्टम रिपोर्ट में राजू कि मौत १२ से २४ घंटे पहले होना दर्शाया गया । यानि अस्पताल एक लाश का ट्रीटमेंट कर रहा था । जब मामला मीडिया में उछला तब जिलाधिकारी वैभव श्रीवास्तव के आदेश पर चिकित्साधिकारी ने तीन सदस्यीय एक कमेटी गठित कर जांच बैठा दी। जांच के दौरान ही चिकित्सक की डिग्री भी फ़र्ज़ी पायी गयी ।वहीँ दूसरी ओर प्रशासन ने एक अन्य अस्पताल पर करवाही करते हुए उसको तो सीज कर दिया । लेकिन जनता में सुगबुगाहट है कि आखिर इस फ़र्ज़ी डिग्रियों के सहारे चलने वाले अस्पताल पर ताले कब लगेंगे । फिलहाल सूत्रों के अनुसार अभी जांच चल रही है । लेकिन फिर वही सवाल की एक मामूली अस्पताल में तो फ़ौरन कार्यवाई हो गयी तो मैकूलाल वीरेन्द्र नाथ अस्पताल पर कार्यवाही कब होगी साहब?

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