मोहित ‘मासूम’@express views
जो बिडेन अधिकारिक रूप से अमेरिका के राष्ट्रपति निर्वाचित हो गए हैं। अमरीका में अभी हाल ही में हुई निर्वाचन मंडल की बैठक में, उन्हें राष्ट्रपति पद और उपराष्ट्रपति के पद पर कमला हैरिस को विजय घोषित कर दिया गया।
अमेरिका में 3 नवंबर को राष्ट्रपति का चुनाव संपन्न हुआ था जिसमें राष्ट्रपति जो बिडेन ने बहुमत प्राप्त कर लिया था। लेकिन तत्कालीन अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने चुनाव परिणामों को स्वीकार करने से ही मना कर दिया था। डोनाल्ड ट्रम्प इन परिणामों के खिलाफ अदालत भी चले गए थे। जहां से उन्हें निराशा ही हाथ लगी। अमरीकी निर्वाचन मंडल द्वारा जो बिडेन को अमेरिका का राष्ट्रपति घोषित करने के बाद डोनाल्ड ट्रंप की उस कानूनी लड़ाई पर भी विराम लग गया है।
अमेरिका में निर्वाचन मंडल की बैठक अभी हाल ही में सम्पन्न हुई है। इस बैठक में सभी 50 राज्यों एवं डिस्टिक आफ कोलंबिया के निर्वाचक सदस्य अपना मत डालने के लिए बैठक का आयोजन करते हैं। वस्तुतः निर्वाचन मंडल बैठक मात्र खानापूर्ति के लिए ही होती है। परंतु फिर भी पिछले वर्षो की तुलना में इस बार अमेरिकी चुनाव परिणाम में ‘गतिरोध’ के कारण यह बैठक काफी अहम हो गई। क्योकि तत्कालीन राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प द्वारा चुनाव परिणामों को स्वीकार करने से मना कर दिया गया। ट्रम्प इस 538 सदस्य वाले निर्वाचक मंडल का भी बहुमत हासिल करने में असफल रहे, जिसके परिणामस्वरूप सत्ता का शांतिपूर्ण हस्तांतरण सफलतापूर्वक पूर्ण हो सका।
अपनी जीत पर बोलते हुए नवनिर्वाचित राष्ट्रपति जो बिडेन ने कहा कि ” निवर्तमान राष्ट्रपति डोनाल्ड ने चुनाव के दौरान अमरीकी जनता की इच्छाओं और कानूनों का अनादर किया है। इससे पहले कभी नहीं देखा गया कि एक विपक्ष ने इस तरह लोगों की इच्छा कानून और संविधान का अनादर किया हो। “
उन्होंने आगे कहा कि ” शुक्र है कि सर्वोच्च न्यायालय ने सर्वसम्मति से उनके इस प्रयास को तत्काल पूरी तरह से खारिज कर दिया। अदालत ने राष्ट्रपति को स्पष्ट संकेत दिया कि वह लोकतंत्र के विपरीत नहीं जा सकते। “
● जो बिडेन का राष्ट्रपति बनना भारत के लिए कितना रहेगा शुभ !
भारत अमेरिकी संबंधों पर नए राष्ट्रपति के निर्वाचन से क्या असर होगा। इसको लेकर शुरुआत से ही कयास लगाए जाते रहे हैं। आज के वर्तमान परिदृश्य में भारत का झुकाव महाशक्ति ‘ रूस ‘ हटकर अमरीका की तरफ ज्यादा हो गया है। यह बात किसी से छिपी भी नहीं। जो बिडेन के राष्ट्रपति निर्वाचित होने से इन संबंधों में और भी ज्यादा प्रांगढ़ता आएगी।
भूतपूर्व अमेरिकी राष्ट्रपति बराक ओबामा के शासनकाल में जो बिडेन अमेरिका के उपराष्ट्रपति थे। उस समय में ऐतिहासिक भारत अमेरिका परमाणु डील को पास कराने में जो बिडेन ने ही महत्वपूर्ण भूमिका निभाई थी। बराक ओबामा भी भारत के प्रति और खास तौर पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के प्रति काफी लगाव रखते थे।
भारतीयों के वीजा नियमों को लेकर भी डोनाल्ड ट्रंप की नीति विवादित रही थी। वह इस संबंध में काफी संकीर्ण सोच रखते थे, और उन्होंने भारतीयों को B1 वीजा देने से भी मना कर दिया था। जो उनकी अंतरराष्ट्रीय जगत का प्रमुख नेता होने की छवि को भी धूमिल करता था। जबकि जो बिडेन की सोच इस दिशा में उदारवादी है, और इसका लाभ भी उन भारतीयों को मिलेगा जो अमेरिका में नौकरी कर रहे हैं, क्या करना चाहते हैं। साथ ही अंतर्राष्ट्रीय पर्यावरण कानूनों को लेकर भी उनका रुख पर्यावरण के हितैषी के रूप में नरम ही प्रतीत होता है। जो बिडेन ने संकेत दिए हैं कि अमरीका कार्बन उत्सर्जन को कम करने और फिर से विश्व पर्यावरण संरक्षण संधि का पालन करते हुए, पर्यावरण को बचाने के लिए विश्व पर्यावरण संरक्षण संगठन से दोबारा जुड़ने के लिए। प्रतिबद्ध रहेगा, जिसका पालन करने से डोनाल्ड ट्रंप पीछे हट गए थे और उन्होंने संगठन से अपना नाता तोड़ लिया था।
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