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नई दिल्ली : सुप्रीम कोर्ट ने लगाई कृषि कानूनों पर अंतरिम रोक, समाधान हेतु 4 सदस्यों की कमेटी का किया गठन।

मोहित ‘मासूम’

नई दिल्ली : माननीय उच्चतम न्यायालय ने अपने अगले आदेश तक तीनों कृषि कानूनों पर अंतरिम रोक लगा दी। अपने आदेश में माननीय सुप्रीम कोर्ट ने केन्द्र सरकार और किसानों के मध्य गतिरोध को दूर करने के लिए एक 4 सदस्यों की कमेटी का गठन कर दिया। जो 2 महीने में अपनी रिपोर्ट सुप्रीम कोर्ट को सौपेगी। विवाद सुलझाने के लिए सुप्रीम कोर्ट ने जिन चार सदस्‍यीय कमेटी का गठन किया है उनमें भूपिंदर सिंह मान (अध्यक्ष बेकीयू), डॉ. प्रमोद कुमार जोशी (अंतरराष्ट्रीय खाद्य नीति अनुसंधान संस्थान), अशोक गुलाटी (कृषि अर्थशास्त्री) और अनिल धनवट (शिवकेरी संगठन, महाराष्ट्र) शामिल हैं। सुप्रीम कोर्ट के इस फैसले को किसान संगठनों ने अपनी जीत बताया और साफ किया कि इस फैसले बाद भी वह अपना आन्दोलन जारी रखेगे। उन्होने कहा कि जब तक तीनों कृषि कानूनों पर पूर्णतया रोक नही लग जाती और उनकी मागों को स्वीकार नही कर लिया जाता, तब तक आन्दोलन जारी रहेगा। किसान संगठनो द्वारा सुप्रीम कोर्ट द्वारा गठित 4 सदस्यों के समिति के नामों पर भी असहमति व्यक्त की है। उनका कहना है हम ना तो कमेटी में शामिल लोगों को स्वीकार करते है और ना ही हम कमेटी के सामने पेश होगें।

अपने आदेश मे क्या कहा माननीय सुप्रीम कोर्ट ने।

चीफ़ जस्टिस की अगुवाई में तीन जजों की बेंच इस मामले में दाखिल याचिका की सुनवाई कर रही है। अपना आदेश सुनाते हुए चीफ़ जस्टिस एसए बोबडे ने कहा, “अगले आदेश तक इन तीनों कृषि क़ानूनों के लागू होने पर रोक लगी रहेगी.”…… न्यूनतम समर्थन मूल्य की व्यवस्था क़ानून पारित होने से पहले की तरह चलती रहेगी।
इन क़ानूनों के तहत की गई किसी भी कार्रवाई के परिणामस्वरूप किसी भी किसान को उसकी ज़मीन से न तो बेदखल किया जाएगा और न ही वंचित किया जायेगा।

अपना आदेश सुनाते हुए उन्होने आगे कहा कि भूपिंदर सिंह मान, प्रमोद कुमार जोशी, अशोक गुलाटी और अनिल घनवंत की सदस्यता वाली कमेटी कृषि क़ानूनों पर किसानों की शिकायतें और सरकार का नज़रिया सुनेगी और उसके आधार पर अपनी सिफारिशें देगी। कमेटी दो महीने के भीतर सुप्रीम कोर्ट में अपनी रिपोर्ट फाइल करेगी। कमेटी की पहली बैठक दस दिनों के अंदर होगी। कमेटी को काम करने के लिए केन्द्र सरकार उसे दिल्ली में जगह मुहैया कराएगी और उसके खर्चे का वहन करेगी।

चीफ जस्टिस ने अपने आदेश मे किसान संगठनों से कहा कि
” किसान संगठनों के प्रतिनिधि चाहे वे विरोध प्रदर्शन कर रहे हों या नहीं, चाहे वे इन क़ानूनों के समर्थन में हों या विरोध में, वे अपनी बात रखने के लिए कमेटी के सामने पेश होंगे।”

चीफ़ जस्टिस एसए बोबडे ने कहा, “हम कमिटी का गठन कर रहे हैं ताकि हमारे सामने एक साफ तस्वीर आ सके। हम यह दलील नहीं सुनना चाहते हैं कि किसान कमिटी के सामने नहीं जाएंगे। हम समस्या का समाधान चाहते हैं। अगर आप अनिश्चित समय के लिए विरोध-प्रदर्शन करना चाहते हैं तो कर सकते हैं। “
उन्होंने आगे कहा, “हम क़ानून की वैधता को लेकर चिंतित हैं। साथ ही हम विरोध-प्रदर्शन से प्रभावित हो रहे लोगों की ज़िंदगी और संपत्तियों को लेकर भी फिक्रमंद हैं। हमारे पास जो शक्तियाँ हैं हम उसके अनुरूप ही इस समस्या का समाधान निकालने की कोशिश कर रहे हैं और हमारे पास क़ानून को निरस्त करने और कमिटी गठित करने का अधिकार है।”

उन्होंने कहा, “यह कमिटी हमारे लिए हैं। आप सभी लोग जो इस समस्या का समाधान चाहते हैं, वे कमिटी के सामने जाएंगे। वो कोई आपको सज़ा नहीं देंगे। वे सिर्फ़ हमें रिपोर्ट सौंपेंगे। कमिटी इस मामले में न्यायिक प्रक्रिया का एक हिस्सा है। हम क़ानून को निलंबित करने की योजना बना रहे हैं लेकिन अनिश्चित समय के लिए नहीं।”

● किसान संगठनों ने कमेटी मे चुने गये सदस्यों पर जतायी असहमति। कहा हम नही होगें कमेटी के समक्ष पेश।

किसानों ने सुप्रीम कोर्ट द्वारा गठित कमेटी के कुछ सदस्यों पर अपनी असहमति जतायी। किसान संगठनों का कहना है कि कमेटी में कुछ ऐसे लोगों को रखा गया है जो शुरू इन कृषि कानूनों की वकालत करते आये है। ऐसे में निष्पक्षता की उम्मीद कैसे की जा सकती है। इसलिए हम कमेटी के सामने पेश नही होगें। हम सभी किसान संगठन ‘ संयुक्त किसान मोर्चा ‘ के अन्तगर्त आपस में बैठकर ही समस्या के हल हेतु प्रयासरत रहेगें। हम कमेटी की बैठक मे हिस्सा नही लेगें।

कमेटी पर बोलते हूए किसान संगठनो ने आगे कहा कि वैसे भी इस कमिटी की बात हमें हजम नहीं हो रही है। हम तो क़ानूनों को रद्द करवाना चाहते हैं। यह कहीं न कहीं मामले को ठंडे बस्ते में डालने जैसी बात है। उन्होंने साफ तौर पर कहा कि हमारा धरना तब तक चलता रहेगा क़ानून पूर्णतया रद्द नहीं हो जाता।

भारतीय किसान यूनियन के अध्यक्ष राकेश टिकैत ने ट्वीट किया, ” माननीय सर्वोच्च न्यायालय द्वारा गठित कमेटी के सभी सदस्य खुली बाजार व्यवस्था या कानून के समर्थक रहे हैं। अशोक गुलाटी की अध्यक्षता में गठित कमेटी ने ही इन कानून को लाये जाने की सिफारिश की थी। देश का किसान इस फैसले से निराश है।”

राकेश टिकैत ने कहा, ‘हमें कमेटी पर एतराज नहीं है, कमेटी लोग कौन हैं उनकी विचारधारा क्या है, उस पर ऐतराज है। ” भूपिंदर सिंह मान के नाम पर भी टिकैत ने आपत्ति जताई। उन्होंने कहा कि, ‘भूपिंदर सिंह मान जो कि पिछले 25 साल से अमेरिकन मल्टीनेशनल कंपनियों की वकालत करता हो, वो हिन्दुस्तान के किसानों के भाग्य का फैसला करेगा। ये कौन लोग हैं। ” 

कोर्ट के फैसले पर ऐतराज के सवाल पर राकेश टिकैत ने कहा कि हम अवहेलना नहीं कर रहे हैं। कोर्ट के आदेश की अवहेलना बीजेपी के लोग करते हैं। हम तो सुप्रीम कोर्ट को भगवान मानते हैं।

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