रिपोर्ट: रामसिंह गिल
सितारगंज के सामुदायिक स्वास्थ्य केन्द्र मे काफी सालों से आयुर्वेदिक चिकित्सा का आयुष विंग क्लीनिक चिकित्सा विभाग द्वारा संचालित है।जिसमें एक डॉक्टर की सेवा संविदा पर बहुत थोड़े वेतन पर चल रही है।
बताते चलें कि एलोपैथिक विभाग द्वारा आयुर्वेदिक डॉक्टर की ड्यूटी अपने विभाग में आयुर्वेदिक पद्धति से न के बराबर हैं।होता यूँ है ।एलोपैथिक विभाग द्वारा आदेश पर अपनी ओ पी डी छुड़वाकर एलोपैथिक विभाग की ड्यूटी लगातार जारी करवाई जा रही है।जिसमें आयुर्वेदिक देशी दवा लेने वाले मरीज आते हैं।जब क्लीनिक मे डॉक्टर को बैठा न देखकर मरीजों को परेशान होना पडता है।
आयुर्वेदिक चिकित्सक श्री राहुल कदीमी का कहना है।कि जब से सितारगंज मे तैनाती हुई है।तब से कभी कभार मै अपनी आयुर्वेदिक ओ पी डी को देखता हूँ।जब एलोपैथिक विभाग के सामुदायिक स्वास्थ्य केन्द्र में ग्रामीण क्षेत्र में जाने या एलोपैथिक अस्पताल में कोरोना 19 की ड्यूटी जबरदस्ती करवाई जाती है।डॉक्टर का कहना है।यही तो ड्यूटी केवल फार्मासिस्ट वार्ड वाय या ए. एन.एम.स्टाफ की की होती है।जिसमें इंजेक्शन देना या डाक्यूमेंट तैयार करना।न कि एक डिग्री होल्डर की।ऐसी ही आयुर्वेदिक चिकित्सा पद्धति का ढांचा रहा हो तो एक दिन आयुर्वेद चिकित्सा से मरीजों का विश्वास उठ जाएगा।और सामुदायिक स्वास्थ्य केन्द्र में देशी दवाई न मिलने के कारण बंद होने के कगार पर पहुंच जाएगा।जबकि आयुर्वेदिक विभाग में कोई स्टाफ नहीं है केवल डॉक्टर ही है।सरकारी क्लीनिक पर डॉक्टर न होने पर मरीज इंतजार करते वापस लौट जाते हैं।
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