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डिजिटल इंडिया पर सरकार और कर्मचारी उड़ा रहे कानून की धज्जियाँ।नही हुआ स्वास्थ्य सुविधाओं का विकास।

रिपोर्ट: रामसिंह गिल सितारगंज। क्षेत्र में स्वास्थ्य और शिक्षा डिजिटल इंडिया के नाम पर भवनों की ऊपर से लीपापोती कर जनता जनार्दन को पूरी तरह से धोखा देने मे कोई कोर कसर बाकी नहीं बची है।

आपको बता देें कि सितारगंज सामुदायिक स्वास्थ्य विभाग क्षेत्र ग्राम मैनाझुंडी मे प्राइमरी स्वास्थ्य केन्द्र नाम मात्र के लिए संचालित है।ग्राम मैनाझुंडी मे अधिकतर पंजाबी लोग रहते हैं। इस अस्पताल में 10 वर्षों से किसी डॉक्टर को नियुक्त नहीं किया गया है ।केवल एक फार्मासिस्ट की तैनाती है और वो भी मनमानी ढंग से ड्यूटी करता है।

हैरानी की बात यह है कि स्वास्थ्य विभाग की ओर से वहीं के अस्पताल में एक सरकारी आयुर्वेदिक क्लीनिक भी संचालित किया गया है।आयुर्वेदिक डॉक्टर को निवास वही पर प्रांगण मे भवन में दिया गया है।ग्रामीण इलाके में होने के कारण कोई आयुर्वेदिक डॉक्टर और एलोपैथिक की समयानुसार सरकारी ड्यूटी पर तैनात व्यवस्था का बुरा हाल है।
आयुर्वेदिक डॉक्टर ज्यादातर अस्पताल में ड्यूटी नहीं निभाता बल्कि अपने निवास पर आराम फरमाता देखा जाता है।
और इस बात हैरान कर देने वाली है अस्पताल के अंदर एक आपरेशन थियेटर मरीजों के आपरेशन हेतु बनाया गया है।सूत्रों के अनुसार आजतक कोई आपरेशन नहीं हुआ ।बल्कि सरकार ने डिजिटल इंडिया के नाम पर जनता को ठगा है।।ग्रामीण क्षेत्र में आपरेशन थियेटर क्यों बनाया गया इसका जवाब न सरकार व स्वास्थ्य विभाग के पास है।लेकिन भवन निर्माण और भवन की लीपापोती करने तो कुछ दाल में काला घोटाला होने की संभावना अवश्य संदेह घेरे में होना तो होगा।डिजिटल इंडिया का सपना चकनाचूर हो रहा है।
जब एलोपैथी फार्मासिस्ट से पत्रकार ने अस्पताल की व्यवस्था के विषय में वीडियो रिकॉर्डिंग करके पूछना चाहा तो व्यवस्था को न बताकर उल्टा ही पत्रकार का वीडियो बनाने लगा। और पत्रकार पर रौब दिखाने लगा।और बोलने लगा कि शिकायत करने से कोई फायदा नहीं।क्योंकि नौकरी जाने का कोई खतरा नहीं।बल्कि शिकायत करने वाले को कठघरे में खड़ा हो कर उसके ऊपर स्वयं ही आरोप साबित हो सकता है।ऊपर अस्पताल काफी चमक दमक मार रहा है।परन्तु शौचालय और जल ही जीवन व्यवस्था डगमगा रही है।के लिए विकास के नाम पर विनाश हो रहा है।बल्कि ग्रामीण क्षेत्र अस्पताल का स्थांतरण कर मेन रोड पर स्थित किया जाता तो सही मायनों में डिजिटल इंडिया का विकास हो सकता था।वैसे पंजाब लोग सरकारी छोटे मोटे अस्पताल में दवा नहीं लेना चाहते हैं।

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