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निजी अस्पताल में नवजात को कर दिया मृत घोषित, जिला अस्पताल पहुंचे परिजन तो निकला जिंदा

बरेली। शहर के एक निजी अस्पताल में नवजात को मृत घोषित कर दिया। कहा कि बच्चे में अब कुछ भी नहीं बचा। उसे यहां से अब सीधे शमशान घाट लेकर जाओ। मगर बच्चे के पिता उसे शमशान घाट की जगह जिला अस्पताल लेकर पहुंचे। पता चला कि बच्चा जिंदा है, अस्पताल में डॉक्टरों ने उसे इमरजेंसी में भर्ती कर इलाज शुरू कर दिया है। बताया जा रहा है कि इसके बाद परिजनों ने निजी अस्पताल में हंगामा भी काटा था।

चौकी चौराहा स्थिति एक अस्पताल का है मामला
दरअसल, कालीबाड़ी के रहने वाले संजीव राना की पत्नी प्रियंका राना ने चार सितंबर को एक निजी अस्पताल में बच्चे को जन्म दिया। दो दिनों बाद बच्चे की तबियत बिगड़ने लगी तो उसे चौकी चौराहा स्थिति एक निजी अस्पताल में भर्ती कराया। जहां डॉक्टर ने उसे वेंटिलेटर पर रख दिया। करीब पांच दिन वेंटिलेटर पर रहने के बाद बच्चे की तबियत में सुधार हुआ तो उसे केवल ऑक्सीजन पर ले आए। कुछ दिन वह ऑक्सीजन पर रहा इसके बाद उसके मुंह में छाले हो गए और उसकी हालत फिर से बिगड़ने लगी।

करीब डेढ़ लाख रुपए का तैयार कर दिया बिल
परिजनों का आरोप है कि जब बच्चे की हालत बिगड़ने लगी तो डॉक्टर ने परिजनों को बुलाया और कि इलाज में उनका करीब डेढ़ लाख रुपया खर्च हो चुका है। मगर अब उनका बच्चा मर चुका है। सिर्फ ऑक्सीजन ही लगी है, जो भी सांसे दिखाई दे रही है, ऑक्सीजन हटाते ही वह भी नहीं बचेगी। आरोप है कि डॉक्टर ने कहा कि अब बच्चे में कुछ नहीं बचा, उसे सीधा शमशान घाट ले जाओ। मगर परिजन उसे वहां से निकालकर सीधे जिला अस्पताल लेकर पहुंचे। जहां उसे जिंदा बताया गया। जिला अस्पताल के डॉक्टरों ने उसे इमरजेंसी में भर्ती कर इलाज शुरू कर दिया है।

ठेला लगाने का काम करते है बच्चे के पिता
परिजनों ने बताया कि नवजात के पिता संजीव कालीबाड़ी में ही ठेला लगाकर अपने परिवार का पालन पोषण करते है। जब उनका बच्चा बीमार हुआ तो उन्होंने उसके इलाज के लिए कर्ज तक ले लिया। मगर अस्पताल का पूरा पैसा चुकाया। हालात यह हो गए कि अस्पताल का बिल लगातार बढ़ता रहा। मजबूरी में पिता ने अपनी बाइक को भी गिरवी रख दिया। फिर भी अस्पताल का मीटर चलता रहा।

परिजनों की गुहार पैसा वापस करा दो
बच्चे के मां-बाप की ने गुहार लगाई है कि अस्पताल प्रशासन ने झूठ बोलकर जिंदा नवजात को तो मार ही डाला। मगर उसके इलाज में जो पैसा बर्बाद हुआ उसे कम से कम अस्पताल प्रशासन को वापस करना चाहिए। इसके लिए प्रशासन से भी गुहार लगाई है।

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