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राजकीय पॉलिटेक्निक में कॉलेज तंत्र ने ठेकेदार की मिलीभगत से हरे वृक्षों का करवा दिया कत्ल

पीलीभीत। प्रकृति से छेड़छाड़ करने में धन प्रलोभी अभी भी परहेज नही कर रहे हैं।कोरोना काल मे जहां सरकार वृक्षारोपण करने सहित ऑक्सीजन प्लांट लगाने में करोड़ों रुपए खर्च कर रही है तो वहीं शुद्ध वायु और फल देने बाले सेमल के हरे-भरे वृक्षों का कत्ल करके धन प्रलोभी सरकारी व गैर सरकारी लोगों द्वारा सरकारी संपत्ति को नुकसान पहुँचाने की कोशिश की गई है। हालांकि पॉलिटेक्निक तंत्र सहित ठेकेदार अपने मंसूबे में कामयाब नही हो सके हैं।

क्या है मामला
विलगवां रोड स्थित राजकीय पॉलिटेक्निक पीलीभीत परिसर के बीच बड़ी संख्या में विभिन्न प्रजाति के हरे -भरे वृक्ष खड़े हैं और इन वृक्षों की संख्या कम करते हुए नवनिर्माण कार्य की आड़ में राजकीय पॉलिटेक्निक के प्रधानाचार्य मुकेश कुमार ने लकड़ी ठेकेदारों से सांठगांठ करके सेमल के तीन बड़े वृक्षों पर आरा चलवाकर उनका कत्ल करा दिया।रातोंरात लकड़ी उठवाने की प्लानिंग पर उस वक्त पानी फिर गया जब रविवार की देर शाम एक पत्रकार ने लकड़ी को उठने से रुकवाकर प्रधानाचार्य मुकेश कुमार को फोन कर सरकारी परिसर से हुए वृक्षों के कटान की जानकारी की।
प्रधानाचार्य मुकेश कुमार ने फोन पर पत्रकार को बताया कि वह टीईटी की परीक्षा डियूटी से अभी लौटे हैं और उन्हें राजकीय पॉलिटेक्निक परिसर में हुए वृक्षों के कटान से संबंधी कोई जानकारी नही है।
नापाक मंसूबों में नाकामयाब होते देख प्रधानाचार्य मुकेश कुमार ने अपनी गर्दन बचाने के लिए सोमवार को नाटकीय भूमिका पेश करते हुए प्रभागीय निदेशक वन एवं वन्य जीव प्रभाग पीलीभीत को अपने कार्यालय से पत्रांक संख्या 952 / AICTE भवन निर्माण / 2022 दिनांक 24-01-2022 प्रस्तुत करना दर्शाया है। प्रभागीय निदेशक को प्रस्तुत किये गए पत्र में लिखा है कि संस्था परिसर में हो रहे नवनिर्माण में बाधक सेमल के तीन पेड़ों को सुरक्षा की दृष्टि से इस आशय से कटवाकर रखवा लिया गया है जिससे किसी प्रकार की जनहानि न हो पाए। इतना ही नही पत्र में प्रकाष्ठ की नीलामी हेतु मूल्यांकन कराने का भी अनुरोध किया गया है।

कार्यदायी संस्था को भी नही थी पेड़ काटने की जानकारी।

मजे की बात यह है कि कार्यदायी संस्था यूपीआरएनएसएस के किसी भी अधिकारी ने काटे गए वृक्षों को नवनिर्माण कार्य मे बाधक नही बताया और न ही वृक्षों के कटने की उनको कोई जानकारी थी। प्रभागीय निदेशक को प्रस्तुत किये गए पत्र में भी तकनीकी स्तर पर वृक्षों को निर्माण कार्य मे बाधक नही बताया गया । अब ऐसे में सवाल यह खड़ा होता है कि भवन निर्माण के प्रारंभ से ही उल्टे – सीधे काम करके राजकीय पॉलिटेक्निक तंत्र सरकार को क्षति पहुँचाने में सक्रिय हो गया है तो भवन का निर्माण पूर्ण होने तक न जाने कितने रूपों में सरकार को क्षति पहुंचाकर राजकीय पॉलिटेक्निक तंत्र अपनी गतिविधियों को विराम देगा।

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