अवनीश श्रीवास्तव@express views
पीलीभीत। वन्य एवं वन्य जीव प्रभाग पीलीभीत, पीलीभीत टाइगर रिजर्व और विश्व प्रकृति निधि के मार्गदर्शन में समाधान विकास समिति विपनेट क्लब द्वारा विश्व गौरैया दिवस के उपलक्ष में जागरूकता कार्यक्रम का आयोजन किया गया।
जिसमे बताया गया कि किस प्रकार कीटनाशकों के इस्तेमाल, आहार- आवास की कमी, मोबाइल फोन तथा मोबाइल टावरों से निकलने वाली सूक्ष्म तरंगे गौरैया के अस्तित्व के लिए खतरा बन रही हैं।
आवास विकास स्थित डब्ल्यूडब्ल्यूएफ कार्यालय में एक कार्यशाला का आयोजन किया गया जिसमें सामाजिक वानिकी के रेंजर श्री देवेंद्र कुमार डब्ल्यूडब्ल्यूएफ के परियोजना अधिकारी श्री नरेश कुमार और वरिष्ठ पत्रकार श्री केशव अग्रवाल ने गौरैया सहित अनेक जीवन की जीवन पर रोशनी डालते हुए वहां मौजूद लोगों को जानकारी दी इसके अलावा गौरैया स्वच्छ पर्यावरण की सूचक है ।
जिस पर्यावरण में गौरैया रह सकती है वह पर्यावरण हमारे लिए स्वस्थ है। कई बार लोग अपने घरों में पक्षी के घोसले को बसने से पहले उजाड़ देते हैं।बच्चे इन्हें पकड़कर पहचान के लिए पैर में धागा बांधकर छोड़ देते हैं, जिससे पेड़ की टहनियां- शाखाओं में अटक कर इनकी जान को खतरा हो जाता है ।
कई बच्चे गौरैया के बच्चों को पकड़कर उनके पंखों को रंग देते हैं ,जिससे उड़ने में दिक्कत होती है और उनके स्वास्थ्य पर विपरीत प्रभाव पड़ता है। हमें ऐसी आदतों के विरुद्ध बाल एवं किशोर पीढ़ी को जागरूक करना पड़ेगा। 2010 से निरंतर गौरैया दिवस मना रहे हैं तथा 2012 में गौरैया को दिल्ली सरकार द्वारा राज्य पक्षी घोषित किया गया। इस कार्यक्रम में वन दरोगा सोनी सिंह,नवनीत सिंह बोरा, प्रेमचंद्र मौर्या, राजेंद्र राजपूत, राहुल कुमार अनीश कुमार सहित काफी लोग मौजूद रहे।
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