लखनऊ:इतिहास संकलन समिति की महत्वपूर्ण बैठक आयोजित, जिले के वास्तविक इतिहास के सर्वे व संकलन के निर्देश
अखिलेश मिश्रा@express views
लखनऊ। 12 दिसंबर को इतिहास संकलन समिति, अवध प्रांत (उत्तर भाग) की एक महत्वपूर्ण बैठक अलीगंज स्थित राम राम बैंक चौराहे के पास केसरिया भवन के द्वितीय तल पर आहूत की गई। बैठक की अध्यक्षता अखिल भारतीय इतिहास संकलन योजना के राष्ट्रीय सह संगठन सचिव संजय श्रीहर्ष मिश्र ने की।
बैठक में अवध प्रांत के प्रचार प्रमुख डॉ. मुकेश कुमार, अखिलेश मिश्र, अर्पित मिश्र, सुशील कुमार त्रिपाठी, आचार्य शिवाकांत मिश्र, रूपा श्रीवास्तव, डॉ. साधना द्विवेदी, डॉ. मुनेंद्र सिंह एवं डॉ. अरुण कुमार श्रीवास्तव सहित कई आजीवन सदस्य उपस्थित रहे।
राष्ट्रीय सह संगठन सचिव संजय श्रीहर्ष मिश्र ने सभी सदस्यों को निर्देशित किया कि लखनऊ जनपद के संपूर्ण जिले का सर्वे किया जाए और जिले से संबंधित अब तक लिखी गई सभी ऐतिहासिक पुस्तकों का संकलन किया जाए। साथ ही गढ़ व्यवस्था को प्रमुखता के साथ व्यवस्थित करने के निर्देश भी दिए गए।
बैठक में 5 से 7 दिसंबर 2025 को समालखा, पानीपत में संपन्न हुए अखिल भारतीय इतिहास संकलन योजना के 13वें महाधिवेशन की विस्तृत जानकारी भी साझा की गई।
इस अवसर पर लखनऊ के वास्तविक इतिहास से जुड़े कई अनछुए और गूढ़ तथ्यों पर प्रकाश डाला गया। बताया गया कि जानकीपुरम का नाम मड़ियांव गांव में स्थित लगभग 150 वर्ष पुराने जानकी मंदिर के कारण पड़ा। पल्टन मड़ियांव छावनी से ही 1857 के गदर की शुरुआत मानी जाती है। लखनऊ की खानपान शैली की विशेषता का उदाहरण दिया गया।
बैठक में यह भी बताया गया कि टिकैतराय ने लखनऊ में पहली आवास विकास योजना शुरू की थी, जिसके अंतर्गत 13 वीआईपी कॉलोनियां बसाई गई थीं। अवध के नवाब आसफुद्दौला ने 78 ग्राम सभाओं को मिलाकर लखनऊ की स्थापना की थी और वर्ष 1851 में लखनऊ विश्व का सबसे बड़ा शहर था।
इसके अलावा खास बाजार, नक्खास बाजार, लाटूश रोड और मॉडल हाउस जैसी ऐतिहासिक जानकारियों को भी साक्ष्यों के साथ प्रस्तुत किया गया। राष्ट्रीय सह संगठन सचिव ने इन सभी अनछुए पहलुओं पर गहन शोध कर विस्तार से लिखने के निर्देश दिए।
बैठक में उपस्थित सदस्यों ने इन निर्देशों पर शीघ्र कार्य प्रारंभ करने का संकल्प लिया।
