पीलीभीत:लोकतंत्र से बड़ा खिलवाड़, वोटर लिस्ट में महाघोटाला, दो पूर्व SDM समेत तीन पर FIR
- हजारों मतदाताओं के नाम और पहचान बदली, निर्वाचन आयोग के निर्देशों की उड़ी धज्जियां
- अमरिया के तत्कालीन एसडीएम मयंक गोस्वामी व हेमंत कुमार और कंप्यूटर सहायक पर गिरी गाज
- 13 हजार से ज्यादा फॉर्म बिना SOP के हुए पास, कोतवाली में दर्ज हुआ गंभीर धाराओं में मुकदमा

पीलीभीत । जिले में लोकतंत्र के मूल आधार यानी मतदाता सूची में एक बेहद गंभीर और सनसनीखेज फर्जीवाड़े का खुलासा हुआ है। अमरिया तहसील क्षेत्र में हजारों मतदाताओं के नामों में बड़े पैमाने पर हेराफेरी की गई है। चुनाव आयोग की सख्ती के बाद इस महाघोटाले में अमरिया के दो तत्कालीन उपजिलाधिकारियों और एक कंप्यूटर सहायक के खिलाफ पीलीभीत शहर कोतवाली में गंभीर धाराओं में एफआईआर दर्ज कराई गई है। इस कार्रवाई से प्रशासनिक महकमे में हड़कंप मच गया है।
जानकारी के अनुसार, ऑनलाइन चेकिंग में सामने आया कि कई मतदाताओं की पहचान ही बदल दी गई। जानकारी के मुताबिक असली मतदाता रईस अली का नाम बदलकर रिकॉर्ड में हुजैब अली कर दिया गया। इसी तरह गुफरान असलम के नाम में छेड़छाड़ की गई और आशिक अली के स्थान पर खलील खां का नाम दर्ज कर दिया गया। यह महज़ लिपिकीय त्रुटि नहीं, बल्कि एक सुनियोजित साजिश की ओर इशारा करता है।
वहीं चौंकाने वाले आंकड़े सामने आए हैं। 31 मई 2026 से 29 अगस्त 2026 के बीच बिना किसी फील्ड वेरिफिकेशन और एसओपी का पालन किए धड़ल्ले से फॉर्म पास किए गए। तत्कालीन एसडीएम मयंक गोस्वामी के कार्यकाल में 4,717 फॉर्म कंप्यूटर में दर्ज किए गए
इसके बाद एसडीएम हेमंत कुमार के कार्यकाल में 9,062 फॉर्म की प्रविष्टि हुई। कुल 13,779 फॉर्म ईआरओ लॉगिन से प्रोसेस किए गए, जिनमें से 10,470 को आंख मूंदकर स्वीकृत कर लिया गया और 3,309 अस्वीकृत हुए। इलेक्टोरल रोल मैनुअल 2023 के नियमों के तहत ईआरओ को 10% फॉर्म खुद चेक करने होते हैं, लेकिन यहां ऐसा कुछ नहीं हुआ।
सहायक जिला निर्वाचन अधिकारी कृष्ण कुमार कश्यप की जांच और तहरीर के आधार पर 22 अक्टूबर 2026 को कोतवाली पीलीभीत में FIR संख्या 0352) मुकदमा दर्ज किया गया है।
तत्कालीन एसडीएम अमरिया मयंक गोस्वामी निर्वाचक रजिस्ट्रीकरण अधिकारी , तत्कालीन एसडीएम अमरिया हेमन्त कुमार रजिस्ट्रीकरण अधिकारी ,कंप्यूटर सहायक अनिल कुमार वीआरसी तीनों के खिलाफ लोक प्रतिनिधित्व अधिनियम 1950, 1951, 1989 की धारा 32 और भारतीय न्याय संहिता BNS 2023 की धारा 201 के तहत केस दर्ज किया गया है।
पुलिस ने प्रकरण दर्ज कर लिया है। पुलिस अब सर्वर लॉग्स और उन आईडी की जांच करेगी जिनसे यह अप्रूवल दिए गए। माना जा रहा है कि इस मामले में जल्द ही कुछ और बड़ी विभागीय कार्रवाइयां हो सकती हैं।
