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पीलीभीत: रसूखदार प्रॉपर्टी डीलर को बड़ा झटका, कर्मचारी की मौत मामले में जमानत याचिका खारिज


पीलीभीत। जनपद के चर्चित अनिल हत्याकांड और संदिग्ध मौत के मामले में मुख्य आरोपी प्रॉपर्टी डीलर वेदप्रकाश कश्यप को जिला अदालत से बड़ा झटका लगा है। बुधवार को जिला जज की अदालत ने दोनों पक्षों की दलीलों को सुनने के बाद आरोपी की जमानत याचिका को सिरे से खारिज कर दिया। अब वेदप्रकाश को जेल की सलाखों के पीछे ही रहना होगा और जमानत के लिए हाईकोर्ट की शरण लेनी पड़ेगी।

बुधवार को सुनवाई के दौरान अभियोजन और बचाव पक्ष के बीच लंबी जिरह हुई। वादी पक्ष के अधिवक्ताओं ने अपराध की गंभीरता और पुलिस जांच के तथ्यों को अदालत के सामने रखा। मामले की गंभीरता और साक्ष्यों को देखते हुए जिला जज ने आरोपी को राहत देने से इनकार कर दिया और अपना फैसला सुनाते हुए जमानत अर्जी निरस्त कर दी।

क्या था पूरा मामला?
बीते दिनों शहर के रसूखदार प्रॉपर्टी डीलर वेदप्रकाश कश्यप के ऑफिस के बाहर उनके ही कर्मचारी अनिल का शव संदिग्ध परिस्थितियों में लटकता हुआ मिला था। इस घटना ने पूरे शहर को झकझोर कर रख दिया था। मृतक के परिजनों ने आरोप लगाया था कि अनिल की हत्या वेदप्रकाश और उसके साथियों ने मिलकर की है।
पुलिस की कार्यशैली पर उठे थे सवाल
इस मामले में पीलीभीत पुलिस की भूमिका शुरू से ही संदेह के घेरे में रही थी। परिजनों का आरोप था कि रसूख के दबाव में पुलिस मुकदमा दर्ज करने में आनाकानी कर रही थी। हालांकि, मामला गरमाने और कैबिनेट मंत्री की सख्त फटकार के 36 घंटे बाद पुलिस हरकत में आई। दबाव बढ़ता देख शहर कोतवाली में वेदप्रकाश और उसके 3 साथियों के खिलाफ मुकदमा दर्ज किया गया और भारी जन-दबाव के बाद आरोपी की गिरफ्तारी संभव हो सकी थी।

अब हाईकोर्ट की चौखट पर टिकेंगी नजरें
जिला जज द्वारा जमानत अर्जी खारिज होने के बाद अब वेदप्रकाश कश्यप के पास ऊपरी अदालत (हाईकोर्ट) जाने का विकल्प बचा है। कानूनी जानकारों का मानना है कि हाईकोर्ट में प्रक्रिया लंबी होने के कारण आरोपी को अभी लंबे समय तक जेल में ही वक्त गुजारना पड़ सकता है।

 

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