मौत को मात देकर लौटीं विनीता, अंतिम संस्कार की तैयारियों के बीच एम्बुलेंस के एक झटके ने बचाई जान
पीलीभीत। ‘जाको राखे साइयां मार सके न कोय’ वाली कहावत पीलीभीत में उस समय सच साबित हुई, जब डॉक्टरों द्वारा मृतप्राय घोषित की जा चुकी एक महिला न केवल मौत के मुंह से बाहर आई, बल्कि अब पूरी तरह स्वस्थ होकर अपने घर लौट चुकी है। जिला न्यायालय में तैनात विनीता शुक्ला की यह कहानी किसी फिल्मी पटकथा से कम नहीं है, जहाँ मातम के बीच एक सड़क के गड्ढे ने उनकी जिंदगी की डोर को टूटने से बचा लिया।

विनीता शुक्ला की तबीयत बिगड़ने पर उन्हें बरेली के एक निजी अस्पताल में भर्ती कराया गया था, जहाँ डॉक्टरों ने उन्हें ‘ब्रेन डेड’ जैसी स्थिति में बताते हुए बचने की उम्मीद छोड़ दी थी। परिजनों को वेंटिलेटर हटाकर उन्हें घर ले जाने की सलाह दी गई। भारी मन से परिवार अंतिम संस्कार की तैयारी करने लगा और विनीता को एम्बुलेंस से पीलीभीत लाया जाने लगा। घर पर बहू-बेटियों का रो-रोकर बुरा हाल था और मोहल्ले में भी विनीता की मौत की खबर फैल चुकी थी।
कहानी में नाटकीय मोड़ तब आया जब एम्बुलेंस हाफिजगंज के पास एक गहरे गड्ढे में गिरी। उस जोरदार झटके से विनीता के शरीर में अचानक हलचल हुई, जिसे देख परिजनों की उम्मीदें फिर से जाग उठीं। आनन-फानन में उन्हें पीलीभीत के एक निजी अस्पताल में न्यूरोसर्जन डॉ. राकेश सिंह के पास ले जाया गया। डॉ. सिंह ने लक्षणों को भांपते हुए ‘सर्पदंश’ (Snake Bite) का संदेह जताया और तुरंत एंटी-वेनम इलाज शुरू किया।
चमत्कार और सही डॉक्टरी सूझबूझ का असर यह हुआ कि महज 24 घंटे में उनकी हालत में सुधार दिखने लगा और 13 दिनों के गहन इलाज के बाद विनीता अब पूरी तरह स्वस्थ हैं। डॉक्टरों के अनुसार, सांप के जहर के कारण कई बार शरीर ऐसी अवस्था में चला जाता है जो ‘ब्रेन डेड’ जैसी लगती है। विनीता की घर वापसी ने न केवल उनके परिवार की खुशियां लौटाई हैं, बल्कि पूरे जनपद में इस “कुदरती करिश्मे” की चर्चा हो रही है।
