UP में बिजली उपभोक्ताओं को बड़ी राहत: अब स्मार्ट मीटर के लिए ‘प्रीपेड’ रिचार्ज की मजबूरी खत्म, सरकार ने पलटा फैसला
लखनऊ/बरेली। उत्तर प्रदेश की बिजली व्यवस्था में योगी सरकार ने एक बड़ा नीतिगत बदलाव किया है। अब प्रदेश के उपभोक्ताओं पर ‘रिचार्ज वाले’ यानी प्रीपेड स्मार्ट मीटर थोपे नहीं जाएंगे। सरकार ने प्रीपेड स्मार्ट मीटर की अनिवार्यता को पूरी तरह खत्म कर दिया है, जिससे उन लाखों उपभोक्ताओं को राहत मिली है जो इस व्यवस्था का विरोध कर रहे थे।
क्या हुआ है बदलाव?
रिपोर्ट के अनुसार, केंद्र और राज्य स्तर पर हुए संशोधनों के बाद अब स्मार्ट मीटर को ‘चॉइस बेस्ड’ (विकल्प आधारित) बना दिया गया है।
अनिवार्यता खत्म: अब स्मार्ट मीटर तो लगेंगे, लेकिन वे प्रीपेड (पहले रिचार्ज) होंगे या पोस्टपेड (पुराने मीटर की तरह बाद में बिल), इसका फैसला खुद उपभोक्ता करेगा।
1 अप्रैल से प्रभावी: यह नया नियम 1 अप्रैल 2026 से लागू हो चुका है।
क्यों लेना पड़ा यह फैसला?
स्मार्ट मीटर प्रोग्राम के तहत डिस्कॉम कंपनियां बिना पूछे प्रीपेड मीटर लगा रही थीं, जिसका प्रदेश भर में भारी विरोध हो रहा था। इस विरोध के पीछे कई मुख्य कारण थे:
ब्लैकआउट की समस्या: मोबाइल की तरह रिचार्ज करने पर भी तकनीकी खामियों के कारण 24 से 72 घंटे तक बिजली नहीं आती थी।
खराब सर्विस: हेल्पलाइन नंबर (1912) और डिस्कॉम कंपनियों का सर्वर सही ढंग से काम नहीं कर रहा था ।
ग्रामीण क्षेत्रों की चुनौती: गाँवों में इंटरनेट और स्मार्टफोन की कमी के कारण ऐप के जरिए रिचार्ज करना बुजुर्गों और गरीबों के लिए लगभग असंभव था ।
कर्मचारियों का विरोध: बिजली विभाग के कर्मचारियों को अपनी नौकरी जाने का डर था, क्योंकि सब कुछ ऑनलाइन होने से उनकी भूमिका खत्म हो रही थी ।
सरकार का अगला कदम: ‘हर घर और हर समय बिजली’
उत्तर प्रदेश सरकार का लक्ष्य अब केवल बिजली कनेक्शन देना नहीं, बल्कि ‘जीरो ट्रिपिंग’ के साथ निर्बाध बिजली आपूर्ति सुनिश्चित करना है।
स्मार्ट मीटर के फायदे: सरकार के अनुसार, स्मार्ट मीटर से उपभोक्ताओं को ‘रियल टाइम डाटा’ मिलता रहेगा, जिससे वे जान सकेंगे कि उन्होंने कितनी बिजली खर्च की है ।
सब्सिडी का नया मॉडल: भविष्य में बिजली की सब्सिडी सीधे उपभोक्ताओं के बैंक खातों (DBT) में भेजने की भी तैयारी है
