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खजुरिया पचपेड़ा के प्रधान को मिली क्लीन चिट, वित्तीय अधिकार बहाल

  • जांच कमेटी को प्रधान के खिलाफ नहीं मिले कोई सुबूत

विमलेश कुमार@express views

पीलीभीत। सरकारी धनराशि के दुरुपयोग के आरोपों में फंसे विकास खंड बरखेड़ा की ग्राम पंचायत खजुरिया पचपेड़ा के प्रधान राजेंद्र कुमार को जांच के बाद क्लीन चिट मिल गई है। इसके साथ ही प्रधान की सीज किए गए वित्तीय अधिकारों को बहाल कर दिया गया। वहीं लापरवाही पर ग्राम विकास अधिकारी व ग्राम पंचायत अधिकारी की एक साल की वेतनवृद्धि रोकी गई है तथा प्रतिकूल प्रविष्टी दी गई है।
मामला मई 2024 की एक शिकायत से शुरू हुआ था। इसमें प्रधान और सचिवों पर ग्राम पंचायत निधि में अनियमितता के आरोप लगाए गए थे। प्रारंभिक जांच के बाद फरवरी 2025 में प्रधान के अधिकार निलंबित कर दिए गए। प्रधान ने इस आदेश को इलाहाबाद हाईकोर्ट में चुनौती दी। कोर्ट ने जिला प्रशासन को इस मामले में एक महीने में अंतिम फैसला लेने का निर्देश दिया। इसके बाद डीएम ने कमेटी गठित कर जांच कराई। इसमें प्रधान ने आरोपों को गलत बताया। नोटिस के बाद ग्राम विकास अधिकारी पवन पटेल ने अपना स्पष्टीकरण दिया जबिक ग्राम पंचायत अधिकारी केपी सिंह ने अपना कोई स्पष्टीकरण नहीं दिया। जांच पूरी होने के बाद प्रधान राजेंद्र कुमार को क्लीन चिट दी गई। मजिस्ट्रेट के आदेश में स्पष्ट किया गया है कि प्रधान राजेंद्र कुमार द्वारा दिए गए स्पष्टीकरण और उपलब्ध साक्ष्यों के परीक्षण से वह पांच प्रमुख बिंदुओं कोविड सामग्री खरीद] गौशाला निर्माण] रेन वॉटर हार्वेस्टिंग] हैंडपंप मरम्मत आदि के कार्यों में दोषी नहीं पाए गए। इसके साथ ही प्रधान के वित्तीय अधिकारों को बहाल कर दिया गया। प्रधान के अधिकार बहाल करने के साथ ही तीन सदस्यीय जांच समिति को भंग कर दिया गया।
जांच में पाया गया कि कोरोना के दौरान जो खरीद की गई उसकी कोटेशन नहीं ली गई। खरीद प्रक्रिया में लापरवाही बरती गई। इस पर ग्राम विकास अधिकारी पवन पटेल को अभिलेख अनियमितता और सतर्कता न बरतने के लिए एक वेतनवृद्धि रोकने व प्रतिकूल प्रविष्टि का दंड दिया गया। वहीं ग्राम पंचायत अधिकारी केपी सिंह के खिलाफ पहले ही कार्रवाई हो चुकी है। उन्हें पूर्व में ही एक वेतनवृद्धि रोकने के साथ ही प्रतिकूल प्रविष्टि दी जा चुकी है।

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