पीलीभीत: निजी अस्पताल में डॉक्टरों की लापरवाही से महिला की मौत, ऑपरेशन के दौरान कटी पैर की नस, समझौते की चर्चाएं गर्म
पीलीभीत।शहर के गांधी स्टेडियम रोड स्थित एक नामचीन निजी अस्पताल में डॉक्टरों की कथित लापरवाही के कारण एक 52 वर्षीय महिला की जान चली गई। आरोप है कि ऑपरेशन के दौरान पैर की मुख्य नस कट जाने से लगातार ब्लीडिंग हो रही थी। हालत बिगड़ने पर डॉक्टर ने अपने निजी खर्चे पर महिला को बरेली के अस्पताल में भर्ती कराया, जहाँ इलाज के दौरान उसकी मौत हो गई। शव वापस पीलीभीत लाए जाने पर अस्पताल परिसर में जमकर हंगामा हुआ, जिसके बाद पुलिस को दखल देना पड़ा।
ऑपरेशन के दौरान कटी नस, नहीं रुकी ब्लीडिंग
प्राप्त जानकारी के अनुसार, पुरानी पीलीभीत की रहने वाली लाल कुमारी (52 वर्ष), पत्नी ओंकार, को बीते 12 जुलाई को गांधी स्टेडियम रोड पर स्थित एक प्रतिष्ठित निजी अस्पताल में भर्ती कराया गया था। मृतका के भाई ने बताया कि डॉक्टरों ने पैर का ऑपरेशन करने की बात कही थी। आरोप है कि ऑपरेशन के दौरान डॉक्टरों की लापरवाही से पैर की एक मुख्य नस कट गई, जिसके बाद लगातार खून बहने लगा और ब्लीडिंग नहीं रुकी।
डॉक्टर ने निजी खर्चे पर बरेली भेजा, पर नहीं बची जान
जब महिला की हालत अत्यंत चिंताजनक हो गई, तो निजी अस्पताल के डॉक्टर ने अपनी गलती स्वीकार करते हुए आनन-फानन में मरीज को अपने निजी खर्चे पर बरेली के एक अस्पताल में इलाज के लिए भिजवाया। हालांकि, तमाम प्रयासों के बाद भी महिला की स्थिति में सुधार नहीं हुआ और इलाज के दौरान उसने दम तोड़ दिया।
शव अस्पताल पहुंचते ही हंगामा,बुलाई गई पुलिस
महिला की मौत के बाद आक्रोशित परिजन शव को लेकर वापस पीलीभीत के उसी निजी अस्पताल पहुंचे। अस्पताल परिसर में परिजनों का रो-रोकर बुरा हाल था और माहौल तनावपूर्ण हो गया। संभावित हुड़दंग और हंगामे की आशंका को देखते हुए अस्पताल के डॉक्टर ने तुरंत थाना सुनगढ़ी पुलिस को सूचना देकर मौके पर बुला लिया।शहर के इस नामचीन अस्पताल में हुई इस घटना के बाद स्थानीय स्तर पर हड़कंप मचा हुआ है।
सूत्रों के मुताबिक, मामले को कानूनी पचड़े से बचाने के लिए अस्पताल प्रबंधन और डॉक्टर ने मृतका के परिजनों को एक मोटी रकम देकर आपसी समझौता कर लिया है, जिसके बाद मामला शांत हुआ।
फिलहाल यह पूरी घटना पीलीभीत शहर और स्वास्थ्य महकमे में भारी चर्चा का विषय बनी हुई है, और निजी अस्पतालों की सुरक्षा व डॉक्टरों की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं।