बलूचिस्तान ने मनाया ‘स्वतंत्रता दिवस’, मानवाधिकारों के मुद्दे पर भारत का किया शुक्रिया
@evdesk
दिल्ली।अशांत बलूचिस्तान में बलूच विद्रोहियों ने आजादी का ऐलान करते हुए 11 अगस्त को बड़े पैमाने पर कार्यक्रम आयोजित किए। बलूच नेताओं ने मानवाधिकारों के उल्लंघन के मुद्दे पर भारत के रुख की जमकर तारीफ की और भारतीय मीडिया का आभार जताया। बलूच नेताओं ने स्पष्ट किया कि भारत के व्यापक मानवाधिकार रुख से उनके आंदोलन को बल मिला है। हालांकि, भारत सरकार द्वारा आधिकारिक रूप से बलूचिस्तान को स्वतंत्र राष्ट्र की मान्यता नहीं दी गई है।
मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार,पाकिस्तान के अशांत प्रांत बलूचिस्तान में विद्रोहियों ने अपनी आजादी का ऐलान किया है और पूरे बलूचिस्तान में 11 अगस्त को स्वतंत्रता दिवस के रूप में बड़े पैमाने पर जश्न मनाया। इस मौके पर बलूच नेताओं ने भारत और भारतीय मीडिया की जमकर तारीफ की है।
बलूचों के बड़े नेता मीरयार बलूच ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ (X) पर एक पोस्ट कर भारत को धन्यवाद कहा। उन्होंने लिखा कि भारतीय मीडिया ने विदेश मंत्रालय की प्रेस ब्रीफिंग में बलूचिस्तान के स्वतंत्रता दिवस के जश्न के मुद्दे को प्रमुखता से उठाया।
भारत के रुख का समर्थन:
बलूचिस्तान गणराज्य ने पाकिस्तान के मानवाधिकारों के उल्लंघन पर भारतीय विदेश मंत्रालय के रुख का खुला समर्थन किया है। बलूच पक्ष ने विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल के उस बयान का भी उल्लेख किया, जिसमें उन्होंने पाकिस्तान के कब्जे वाले जम्मू-कश्मीर (PoK) और अन्य क्षेत्रों में मानवाधिकारों के हनन को लेकर पाकिस्तान को जवाबदेह ठहराने की बात कही थी। जायसवाल ने कहा था कि हालिया हिंसा और मानवाधिकारों के हनन पर अंतरराष्ट्रीय समुदाय को पाकिस्तान से जवाब मांगना चाहिए।
यद्यपि बलूचिस्तान गणराज्य ने माना कि भारतीय प्रवक्ता ने विशेष रूप से बलूचिस्तान का नाम नहीं लिया था, इसके बावजूद उन्होंने भारत के इस व्यापक रुख को अपने आंदोलन के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण बताया।
अंतरराष्ट्रीय समुदाय से अपील:
बलूच नेताओं ने बयान जारी कर कहा कि मानवाधिकारों की कोई सीमा नहीं होती। उन्होंने अंतरराष्ट्रीय समुदाय से अपील की है कि वह बलूचिस्तान, गिलगित-बाल्टिस्तान, PoK और पाकिस्तान के नियंत्रण वाले अन्य हिस्सों में हो रहे मानवाधिकार उल्लंघनों पर चिंता जताए और कार्रवाई करे। संगठन ने दावा किया कि बलोच लोगों को न्याय, सम्मान और अपने भविष्य का फैसला खुद करने का अधिकार मिलना चाहिए।
भारत की आधिकारिक नीति को समझना जरूरी:
इस पूरे घटनाक्रम में यह समझना अहम है कि बलूच नेताओं द्वारा भारत की सराहना किए जाने का यह अर्थ कतई नहीं है कि भारत ने बलूचिस्तान को एक स्वतंत्र देश के तौर पर मान्यता दे दी है। भारतीय विदेश मंत्रालय की ओर से ऐसी कोई आधिकारिक घोषणा नहीं की गई है।
विदित हो कि बलूचिस्तान लंबे समय से पाकिस्तान के खिलाफ अलगाववादी आंदोलन का केंद्र रहा है। बलूच संगठन लगातार पाकिस्तान पर मानवाधिकारों के हनन का आरोप लगाते रहे हैं, जबकि पाकिस्तान इन संगठनों को देश की सुरक्षा के लिए खतरा बताता है। बहरहाल, 11 अगस्त के घटनाक्रम और भारत के नाम के उल्लेख ने इस मुद्दे पर राजनीतिक और कूटनीतिक चर्चा को फिर से तेज कर दिया है।
