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जलभराव से नरकीय जीवन जीने को मजबूर ग्रामीण, घरों के बाहर मंडरा रहा मगरमच्छों का खौफ

बरखेड़ा (पीलीभीत)। विकास खंड बरखेड़ा से लगभग 20 किलोमीटर दूर जंगली क्षेत्र में स्थित ग्राम कुसमा के बाशिंदे इन दिनों भारी जलभराव और जंगली जीवों के खौफ के साये में जीने को मजबूर हैं। गांव के करीब एक दर्जन परिवारों के घरों के दरवाजों तक एक से डेढ़ फीट पानी जमा है, जबकि मुख्य रास्तों से निकलने वाले मार्ग पर चार फीट तक पानी भर गया है। हालात इस कदर बिगड़ चुके हैं कि जलभराव के बीच अब अक्सर मगरमच्छ ग्रामीणों के घरों के बाहर डेरा डाले नजर आ रहे हैं, जिससे पूरे इलाके में दहशत का माहौल है।
ग्रामीणों का कहना है कि यह जलभराव पिछले चार महीनों से उनकी नियति बन गया है, जिसने उनका जीवन नरक बना दिया है। इस गंभीर समस्या के समाधान के लिए ग्राम प्रधान से लेकर ब्लॉक स्तर और अन्य संबंधित अधिकारियों तक कई बार गुहार लगाई गई, लेकिन जिम्मेदारों ने इस दर्द को देखकर भी अनदेखा कर दिया है। सरकार द्वारा जलभराव वाले निचले और दुर्लभ रास्तों को ऊंचा करने के लिए समय-समय पर योजनाएं चलाई जाती हैं, इसके बावजूद विभागीय अधिकारियों ने इस रास्ते को दुरुस्त करने में कोई रुचि नहीं दिखाई।

घरों के चारों ओर पानी भरा होने के कारण ग्रामीणों के मन में हर पल यह खौफ बना रहता है कि कब पानी के रास्ते कोई जहरीला कीड़ा या मगरमच्छ घर के अंदर घुस आए। इसी दहशत के चलते परिवारों को रात-रात भर जागकर काटनी पड़ती है। हर तरफ से निराश हो चुके ग्रामीणों ने अब एक आखिरी उम्मीद के साथ मीडिया के सामने अपना दर्द बयां किया है, ताकि शासन-प्रशासन की नींद टूटे और उन्हें इस नरकीय जीवन से मुक्ति मिल सके।

ग्रामीण राकेश कुमार ने बताया कि रास्तों का पानी अब सीधे घरों के दरवाजों से टकरा रहा है। कल रात ही एक विशाल मगरमच्छ तैरता हुआ उनके घर के बाहर चबूतरे पर आ गया था। गनीमत रही कि समय रहते नजर पड़ गई और मोहल्ले वालों ने मिलकर उसे वहां से भगाया, अन्यथा बड़ा हादसा हो सकता था।

स्थानीय निवासी मुन्नी देवी ने बताया कि इस जलभराव से निजात पाने और रास्ता बनवाने के लिए ग्राम प्रधान से लेकर ब्लॉक कार्यालय तक कई बार शिकायत की गई है। लेकिन गरीब ग्रामीणों की फरियाद सुनने वाला कोई नहीं है।

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