रामलीला में लक्ष्मण शक्ति व कुंभकरण वध का सजीव मंचन, गूंजे जय श्रीराम के जयकारे

पीलीभीत। श्री रामलीला महोत्सव संचालन समिति के तत्वावधान में स्थानीय रामलीला मैदान में लक्ष्मण शक्ति, हनुमान-भरत मिलाप, कुंभकरण वध और पुतला दहन की लीला का सजीव व मनमोहक मंचन किया गया। दर्शकों ने भगवान राम के जयकारों से पूरे मैदान को गुंजायमान कर दिया।
सोमवार को रामलीला के मुख्य अतिथि सुमन कंप्यूटर इंस्टीट्यूट के निदेशक सौरभ सक्सेना और सुरभि सक्सेना रहे। वहीं रासलीला में 18 अक्टूबर के प्रमुख यजमान भाजपा जिलाध्यक्ष गोकुल प्रसाद मौर्य, संतराम राठौर, हेमराज दिवाकर, रविन्द्र कुमार समेत अन्य सदस्यों ने ठाकुर जी और राधा रानी की भोग आरती की।
संजीवनी बूटी लाए हनुमान, राम के बाणों से हुआ कुंभकरण का अंत
मंचन में दिखाया गया कि भयंकर युद्ध के दौरान मेघनाद की वीरघातिनी शक्ति लगने से लक्ष्मण मूर्छित हो जाते हैं। लंका से सुषेण वैद्य को लाया जाता है, जिनके कहने पर हनुमान जी हिमालय से संजीवनी बूटी (पूरा पर्वत) लेकर लौटते हैं। रास्ते में अयोध्या के ऊपर भरत जी आसुरी शक्ति समझकर उन पर बाण चलाते हैं, जिससे राम-राम कहते हुए हनुमान नीचे गिरते हैं। भरत जी को पूरा वृतांत सुनाने के बाद हनुमान जी युद्ध क्षेत्र पहुंचते हैं और लक्ष्मण की मूर्छा दूर होती है। इसके बाद रावण कुंभकरण को युद्ध में भेजता है, जिसका भगवान राम अपने तीक्ष्ण बाणों से अंत कर देते हैं। लीला के अंत में कुंभकरण के पुतले का दहन किया गया। इसके पश्चात वृन्दावन के कलाकारों ने श्रीकृष्ण की भव्य लीलाओं का मंचन किया।लीला का सफल संचालन संजय पांडेय ने किया। रामायणी निशांत तिवारी व अंकुर मिश्रा ने रामचरितमानस की चौपाइयों का सुमधुर गायन किया। इस अवसर पर महंत ओमकार नाथ, सुनील मिश्रा, अमरीश शर्मा अंबू, राकेश लोधी, नरेश शुक्ला, प्रेम सिंह, संजीव मिश्रा सहित अनेक पदाधिकारी एवं भारी संख्या में भक्तगण उपस्थित रहे।
समिति ने बताया कि मंगलवार, 20 अक्टूबर को मेघनाद वध, सुलोचना सती एवं पुतला दहन की लीला का मंचन किया जाएगा, जिसमें भव्य आतिशबाजी भी होगी।
