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पीलीभीत: सिस्टम की बेरुखी से तंग आकर किसान का अनोखा विरोध, 9 महीने भटकाया, अब मेरी ज़मीन एसडीएम और लेखपाल को दान कर दो डीएम साहब!”

  • भ्रष्टाचार और लचर व्यवस्था की खुली पोल, पीड़ित ने जिलाधिकारी को पत्र लिखकर कहा- ‘ खतौनी से हटाकर अफसरों के नाम दर्ज कर दो मेरी ज़मीन,

 

(विमलेश कुमार@express views)

पीलीभीत।उत्तर प्रदेश के पीलीभीत जिले में प्रशासनिक संवेदनहीनता और भ्रष्टाचार का एक ऐसा चौंकाने वाला मामला सामने आया है, जिसने पूरे सरकारी अमले को कटघरे में खड़ा कर दिया है। पिछले 9 महीने से अपने जायज काम के लिए दफ्तरों के चक्कर काट-काट कर थक चुके एक पीड़ित किसान ने हताशा में आकर जिलाधिकारी  को एक बेहद कड़ा पत्र लिखा है। पीड़ित ने साफ कहा है कि अब मुझे कोई संशोधन नहीं चाहिए, मेरी आधी बीघा जमीन एसडीएम सदर और लेखपाल को दान कर दी जाए। इस पत्र के सामने आते ही प्रशासनिक हल्के में हड़कंप मच गया है।

5 बार डीएम, कमिश्नर और सीएम तक लगाई गुहार

मामला ग्राम उमरसड का है। यहाँ के निवासी संजीव कुमार पुत्र रामलाल लंबे समय से अपने गाटा संख्या 151 (रकबा 0.202 हे0) में अंश संशोधन (हिस्सा दुरुस्त कराने) के लिए भटक रहे हैं। पीड़ित के अनुसार, उन्होंने इस छोटे से काम के लिए 5 बार जिलाधिकारी से मुलाकात की, मण्डलायुक्त के चक्कर काटे और मुख्यमंत्री तक को प्रार्थना पत्र भेजा। यहाँ तक कि राज्यमंत्री श्री संजय सिंह गंगवार ने भी इस मामले में एसडीएम सदर को 5 बार फोन कर कार्य करने को कहा, लेकिन नतीजा सिफ़र रहा। 9 माह 2 दिन बीत जाने के बाद भी फाइल टस से मस नहीं हुई।

लेखपाल अमित कुमार सक्सेना पर 20,000 रुपये रिश्वत मांगने का गंभीर आरोप

किसान संजीव कुमार ने अपने पत्र में सीधे तौर पर भ्रष्टाचार की पोल खोलते हुए लेखपाल अमित कुमार सक्सेना पर गंभीर आरोप लगाए हैं। पीड़ित का कहना है कि लेखपाल द्वारा गलत अंश दर्ज कर दिया गया या फर्जी नाम खतौनी में बढ़ा दिए गए। जब इस गलती को सुधारने की बात आई, तो लेखपाल पर कोई कार्रवाई नहीं हुई।

पीड़ित ने पत्र में स्पष्ट लिखा है-

“एक छोटा सा काम के लिये लेखपाल को 20000 रुपये ना देने पर मेरा काम आज दिनांक 24/06/2026 तक नहीं हुआ है।”

“ग्राम उमरसड मु0 के गाटा 151 में मेरा अपना हिस्सा 0.033 रकबा होता लगभग आधा बीघा, मैं अपनी स्वेच्छा से एसडीएम सदर श्रीमती श्रद्धा सिंह व लेखपाल अमित कुमार सक्सेना को जमीन दान में देता हूँ। मेरा नाम हटाकर उक्त गाटा में इन अफसरों का नाम दर्ज किया जाये।”

– संजीव कुमार (पीड़ित किसान),

“अफसर रख लें मेरी ज़मीन, मैं एफिडेविट देने को तैयार हूँ”

प्रशासनिक उत्पीड़न से टूट चुके किसान ने विरोध का यह अनोखा रास्ता चुना है। उसने डीएम पीलीभीत को संबोधित पत्र में लिखा है कि वह अपनी मर्जी से अपना हिस्सा एसडीएम सदर श्रीमती श्रद्धा सिंह और लेखपाल अमित कुमार सक्सेना को दान कर रहा है। इसके लिए वह कानूनी एफिडेविट देने को भी तैयार है। पीड़ित ने मुख्यमंत्री जी के शिकायत पोर्टल (आईजीआरएस संख्या: 15151260085379) के निस्तारण पर भी यही फीडबैक दिया है।

सभी प्रार्थना पत्र लिए वापस

व्यवस्था से पूरी तरह निराश हो चुके संजीव कुमार ने साफ कह दिया है कि अब उन्हें तहसील दिवस या किसी भी कार्यालय से कोई उम्मीद नहीं है। उन्होंने अपने पूर्व में दिए गए सभी प्रार्थना पत्र (पत्र संख्या 8375 / 27.11.25) वापस ले लिए हैं। 24 जून 2026 को रिसीव कराए गए इस पत्र की प्रतिलिपि उपजिलाधिकारी (एसडीएम) सदर पीलीभीत को भी सूचना के लिए भेजी गई है।

एक आम नागरिक को सूबे के रसूखदार राज्यमंत्री की पैरवी और मुख्यमंत्री पोर्टल पर शिकायत के बाद भी न्याय के लिए अपनी पुश्तैनी ज़मीन अफसरों के नाम करने की बात कहनी पड़े, तो अंदाज़ा लगाया जा सकता है कि ज़मीनी स्तर पर पीलीभीत का प्रशासनिक तंत्र और तहसील व्यवस्था किस कदर दम तोड़ चुकी है। अब देखना यह है कि इस गंभीर और सनसनीखेज पत्र के बाद क्या आरोपी लेखपाल और जिम्मेदार अधिकारियों पर गाज गिरती है या किसान की यह चीख भी फाइलों में दफन हो जाती है।

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