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नगर पंचायत के विकास कार्यों में ठेकेदार लगा रहा भ्रष्टाचार की सेंध


बरखेड़ा/पीलीभीत। उत्तर प्रदेश सरकार की ओर से ग्रामीण और नगरीय क्षेत्रों में सड़कों के जाल को मजबूत करने और आम जनता को गड्ढामुक्त व मानक के अनुरूप सड़कें मुहैया कराने के सख्त निर्देशों के बावजूद, स्थानीय स्तर पर जिम्मेदार अधिकारी और ठेकेदार सरकारी धन का बंदरबांट करने में कोई कसर नहीं छोड़ रहे हैं। भ्रष्टाचार और लापरवाही का एक ऐसा ही चौंकाने वाला मामला नगर पंचायत बरखेड़ा से सामने आया है, जहां बताया जा रहा है कि वार्ड नंबर 3 में बनाई जा रही एक नई सड़क में खुलेआम मानकों की धज्जियां उड़ाई जा रही थीं। ठेकेदार द्वारा सड़क निर्माण के प्रारंभिक चरण में ही इतना बड़ा खेल कर दिया गया कि देखने वाले दंग रह गए। निर्माण कार्य के दौरान सड़क को मजबूती देने के लिए पत्थर के टुकड़ों (गिट्टी) का इस्तेमाल किया जाना था, लेकिन इसकी जगह पूरी सड़क पर सिर्फ मिट्टी डालकर पटान का कार्य धड़ल्ले से किया जा रहा था। इस घटिया निर्माण कार्य को देखकर स्थानीय निवासियों में भारी आक्रोश पनप गया और कुछ जागरूक नागरिकों ने इस पूरी धांधली का वीडियो बनाकर सोशल मीडिया पर वायरल कर दिया। खबर वायरल होते ही प्रशासनिक अमले और ठेकेदार के खेमे में हड़कंप मच गया, जिसके बाद खुद को फंसता देख ठेकेदार ने आनन-फानन में सड़क से मिट्टी हटवाने का काम शुरू कर दिया है। स्थानीय सूत्रों और वार्ड वासियों से मिली जानकारी के अनुसार नगर पंचायत बरखेड़ा के वार्ड नंबर 3 में पिछले कुछ समय से सड़क निर्माण का कार्य चल रहा है। इस मार्ग के बनने से स्थानीय लोगों को जलभराव और कीचड़ की समस्या से निजात मिलने की उम्मीद थी, लेकिन ठेकेदार की नीयत और कार्यप्रणाली ने उनकी उम्मीदों पर पानी फेर दिया। नियम और तकनीकी मानकों के अनुसार किसी भी डामर या आरसीसी सड़क के निर्माण से पहले उसके आधार को मजबूत करने के लिए गिट्टी, पत्थर और मौरंग का मिश्रण डालकर रोलर से कुटाई की जाती है ताकि सड़क लंबे समय तक टिक सके और भारी वाहनों का दबाव झेल पाए। इसके विपरीत, यहाँ ठेकेदार ने मुनाफे के चक्कर में शॉर्टकट अपनाते हुए पत्थर की जगह केवल मिट्टी को लाकर सड़क पर बिछवाना शुरू कर दिया। सड़क पर सिर्फ मिट्टी का पटान देखकर मोहल्ले के लोग अवाक रह गए। ग्रामीणों का कहना है कि अगर इस मिट्टी के ऊपर ही डामरीकरण या सीमेंट की परत चढ़ा दी जाती, तो पहली ही बारिश में यह पूरी सड़क धंस जाती और सरकारी बजट का लाखों रुपया सीधे पानी में बह जाता। इस मानक विहीन और भ्रष्टाचार की भेंट चढ़ रही सड़क की पोल तब खुली जब क्षेत्र के ही कुछ युवाओं ने इस पूरी अनियमितता को अपने कैमरों में कैद कर लिया। वीडियो में साफ तौर पर देखा जा सकता था कि कैसे पत्थरों की जगह सिर्फ मिट्टी डालकर बेस तैयार करने का दिखावा किया जा रहा था। देखते ही देखते यह वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल होने लगी। खबर जैसे ही डिजिटल मीडिया के माध्यम से जनता और उच्चाधिकारियों के संज्ञान में आई, नगर पंचायत प्रशासन के हाथ-पांव फूल गए। विभागीय कार्रवाई और टेंडर निरस्त होने के डर से घबराए ठेकेदार ने तुरंत अपनी रणनीति बदली। आनन-फानन में मजदूरों और मशीनों को काम पर लगाकर सड़क पर डाली गई अवैध मिट्टी को वापस समेटना और वहां से हटवाना शुरू कर दिया गया। ठेकेदार की इस हड़बड़ाहट ने खुद ही साबित कर दिया कि निर्माण कार्य में बड़े पैमाने पर धांधली की योजना बनाई गई थी और पकड़े जाने के डर से अब सबूतों को मिटाने का प्रयास किया जा रहा है। इस पूरे मामले को लेकर वार्ड नंबर 3 के नागरिकों में नगर पंचायत की कार्यशैली के प्रति गहरा रोष व्याप्त है। स्थानीय निवासियों का आरोप है कि नगर पंचायत के संबंधित अवर अभियंता और अधिकारियों की मिलीभगत के बिना इतना बड़ा खेल होना मुमकिन नहीं है। निर्माण कार्य की निगरानी के लिए जिम्मेदार अधिकारियों ने मौके पर आकर जांच करना भी मुनासिब नहीं समझा, जिससे ठेकेदारों के हौसले बुलंद हैं। वार्ड वासियों ने जिला प्रशासन और जिलाधिकारी पीलीभीत से मांग की है कि इस पूरे मामले की उच्च स्तरीय तकनीकी जांच कराई जाए। नागरिकों का कहना है कि सिर्फ मिट्टी हटवा देने से ठेकेदार के मंसूबे और उसका अपराध कम नहीं हो जाता। सरकारी धन के दुरुपयोग की कोशिश करने वाले ऐसे ठेकेदारों को ब्लैकलिस्ट किया जाना चाहिए और लापरवाही बरतने वाले विभागीय कर्मचारियों पर भी कठोर दंडात्मक कार्रवाई होनी चाहिए ताकि भविष्य में कोई भी नगर पंचायत के विकास कार्यों में इस तरह की अमानक सामग्री का उपयोग करने का दुस्साहस न कर सके।

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