स्मार्ट सिटी में नाव चलाने को हुए मजबूर, डबल इंजन सरकार की विकास गाथा का पर्दाफाश
- स्मार्ट सिटी की खुली पोल लगातार हो रही बारिश से बरेली का बुरा हाल घरों में घुसा पानी
रिपोर्ट:नन्दकिशोर शर्मा
बरेली। स्मार्ट सिटी के नाम पर करोड़ों रुपये खर्च करने का दावा करने वाले नगर निगम प्रशासन की पोल खुल गई है। वार्ड 64 सिक्लापुर (फर्नीचर मंडी) में जलभराव इतना भयंकर हो गया कि वार्ड पार्षद जयप्रकाश राजपूत को गली में नाव डालकर क्षेत्रवासियों को इधर-उधर पहुंचाना पड़ा। यह तस्वीर नगर आयुक्त और भाजपा मेयर डॉ. उमेश गौतम और डबल इंजन सरकार के तथाकथित विकास कार्यों पर करारा तमाचा है।
बारिश के बाद सिक्लापुर की गलियां तालाब में तब्दील हो गईं। पानी इतना भर गया कि आवागमन ठप पड़ गया। बच्चे थर्माकोल की नाव चलाकर विरोध जता रहे , लेकिन पार्षद को खुद नाव का सहारा लेना पड़ा। यह दृश्य स्मार्ट सिटी की फर्जी चमक-दमक को बेनकाब करता है। नाले बंद, ड्रेनेज व्यवस्था ध्वस्त और जिम्मेदार अधिकारी सोए हुए। सालों से यही हाल है, फिर भी मेयर साहब विकास के दावे करते नहीं थकते।
पार्षद राजपूत का यह कदम सिर्फ क्षेत्रवासियों की मदद नहीं, बल्कि नगर आयुक्त और मेयर डॉ. उमेश गौतम के खिलाफ खुला विरोध है। भाजपा शासित नगर निगम में जलभराव की समस्या साल-दर-साल बढ़ती जा रही है। स्मार्ट सिटी प्रोजेक्ट के नाम पर करोड़ों उड़ाए गए, सड़कें बनीं, लेकिन पानी निकालने की बुनियादी व्यवस्था नहीं सुधरी। नाले पर अतिक्रमण, सफाई का अभाव और योजनाओं का सिर्फ कागजी अस्तित्व यही डबल इंजन सरकार की हकीकत है।
क्षेत्रवासी भड़के हुए हैं। वे पूछ रहे हैं कि स्मार्ट सिटी का पैसा कहां गया? क्यों हर बारिश में गलियां डूब जाती हैं? क्यों पार्षद को नाव चलानी पड़ रही है? नगर आयुक्त संजीव मौर्य , मेयर डॉ. उमेश गौतम और नगर निगम प्रशासन को जवाब देना होगा। सिर्फ उद्घाटन और फोटो सत्र से काम नहीं चलेगा। अगर व्यवस्था नहीं सुधरी तो जनता का आक्रोश और बढ़ेगा।
बरेली में विकास सिर्फ भाषणों और बैनरों तक सीमित है। गली में नाव चलना स्मार्ट सिटी का असली चेहरा है ,भ्रष्टाचार, लापरवाही और जनविरोधी रवैये का।
