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सत्ता की हनक पर भारी पड़ी प्रशासनिक सख्ती, ताश के पत्तों की तरह ढहा रसूखदार नेता का साम्राज्य

  • बाजपुर में फर्जी जाति और निवास प्रमाण पत्र बनाने वाले हाईटेक गिरोह का भंडाफोड़, महिला समेत कई हिरासत में

 

पीलीभीत। सत्ता की हनक में कानून को अपनी जेब में समझने वाले एक रसूखदार जनप्रतिनिधि का तिलस्म आखिरकार प्रशासनिक सख्ती के आगे ताश के पत्तों की तरह ढह गया। बरखेड़ा नगर पंचायत के अध्यक्ष और भारतीय जनता पार्टी के नेता श्याम बिहारी भोजवाल को उनके साथियों के साथ उत्तराखंड के उधम सिंह नगर जिले के बाजपुर में फर्जी जाति और स्थाई निवास प्रमाण पत्र बनाने के एक बड़े खेल में रंगे हाथों दबोच लिया गया है। इस सनसनीखेज कार्रवाई से न सिर्फ पीलीभीत बल्कि पड़ोसी राज्य उत्तराखंड के प्रशासनिक और राजनीतिक गलियारों में भी तहलका मच गया है क्योंकि जब रक्षक ही भक्षक बन जाए और जनसेवा की शपथ लेने वाले ही जालसाजी के धंधे में उतर आएं तो व्यवस्था पर सवाल उठना लाजिमी हो जाता है। मिली जानकारी के अनुसार बाजपुर क्षेत्र में लंबे समय से एक हाईटेक गिरोह के सक्रिय होने की सूचना मिल रही थी जो अवैध रूप से फर्जी सरकारी दस्तावेज तैयार कर शासन की आंखों में धूल झोंक रहा था। इस सूचना को गंभीरता से लेते हुए अपर जिला अधिकारी पंकज उपाध्याय और उप जिला अधिकारी ऋचा सिंह के नेतृत्व में तहसीलदार प्रताप सिंह चौहान सहित राजस्व विभाग की एक संयुक्त टीम ने जाल बिछाया और छापेमारी की कार्रवाई को अंजाम दिया। जैसे ही प्रशासनिक अमला मौके पर पहुंचा वहाँ चल रहे गोरखधंधे को देखकर हर कोई हैरान रह गया क्योंकि इस कथित हाईटेक नेटवर्क के तार सीधे पीलीभीत के बरखेड़ा नगर पंचायत के चेयरमैन श्याम बिहारी भोजवाल से जुड़े पाए गए। प्रशासन ने तत्परता दिखाते हुए मौके से भाजपा नेता श्याम बिहारी भोजवाल के साथ ही एक महिला और दो अन्य सहयोगियों को हिरासत में ले लिया जिनके पास से बड़े पैमाने पर फर्जी प्रमाण पत्र और उन्हें तैयार करने की संदिग्ध सामग्री बरामद होने की बात कही जा रही है। प्रशासनिक टीम ने मौके पर ही पूरे मामले की गहनता से पड़ताल की और प्राथमिक साक्ष्यों के आधार पर यह स्पष्ट हो गया कि कागजों की इस हेराफेरी के पीछे एक बहुत बड़ा सिंडिकेट काम कर रहा था जो भोले-भाले लोगों को चूना लगाने के साथ-साथ सरकारी व्यवस्था की साख को भी बट्टा लगा रहा था। हिरासत में लिए गए सभी आरोपियों को प्रशासनिक अधिकारियों ने अग्रिम वैधानिक कार्रवाई के लिए तत्काल पुलिस क्षेत्राधिकारी अखिलेश कुमार, कोतवाल नरेश चौहान, एसएसआई जसविंदर सिंह और उपनिरीक्षक कैलाश चंद्र की सुपुर्दगी में सौंप दिया। पुलिस ने देर रात राजस्व अधिकारियों की तहरीर के आधार पर संगीन धाराओं में मुकदमा दर्ज कर औपचारिकताएं शुरू कर दी हैं और इस बात की बारीकी से तफ्तीश की जा रही है कि इस फर्जीवाड़े का जाल कहाँ तक फैला हुआ है तथा इसमें और कौन से सफेदपोश चेहरे शामिल हैं। इस हाईप्रोफाइल गिरफ्तारी के बाद जहां एक तरफ क्षेत्र के आम लोगों में कानून के प्रति विश्वास जागा है वहीं दूसरी तरफ सत्ताधारी दल के लिए भी यह बेहद असहज करने वाली स्थिति बन गई है क्योंकि सुशासन और जीरो टॉलरेंस का दावा करने वाली सरकार के अपने ही नुमाइंदे जब इस तरह के अपराधों में लिप्त पाए जाते हैं तो विपक्ष को भी बैठे-बिठाए एक बड़ा मुद्दा मिल जाता है। बहरहाल पुलिस अब इस गिरोह के पिछले कारनामों को खंगालने में जुट गई है ताकि यह पता लगाया जा सके कि आरोपियों ने अब तक कितने लोगों के फर्जी प्रमाण पत्र जारी किए हैं और इसके एवज में कितनी काली कमाई की गई है।

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