एसआरएमएस रिद्धिमा के मंच पर साकार हुआ महाभारत के युद्ध का 18वां दिन
बरेलीः असत्य के शोर में जब सत्य खोने लगे, मोह जब आसक्ति में बदल जाए, मर्यादाएं तार तार होकर टूटने लगें। नैतिकता जब सिर्फ दूसरों के उपदेश की बात हो जाए तब द्वापर के बाद शुरू होता है अंधायुग। इन्हीं भावनाओं को समेटे महाभारत युद्ध के 17वें दिन के बाद का मंचन हुआ आज एसआरएमएस रिद्धिमा में हुआ। इसमें सत्य की मर्यादा को पुनः स्थापित करने और अंधेयुग से निकलने का संदेश दिया गया। अंबुज कुकरेती के निर्देशन में धर्मवीर भारती के नाटक अंधायुग ने दर्शकों के सामने रिद्धिमा में…
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