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करोड़ों के बैंकिंग घोटाले की सीबीआई जांच की मांग, हिन्दू महासभा ने डीएम को सौंपा ज्ञापन

पीलीभीत। करोड़ों रुपये के कथित बैंकिंग घोटाले को लेकर अखिल भारत हिंदू महासभा ने मंगलवार को जिलाध्यक्ष पंडित पंकज शर्मा के नेतृत्व में जिलाधिकारी को एक विस्तृत ज्ञापन सौंपकर मामले की सीबीआई अथवा किसी स्वतंत्र उच्चस्तरीय एजेंसी से जांच कराने की मांग की। संगठन ने आरोप लगाया कि प्रकरण केवल एक बैंक खाते तक सीमित नहीं है, बल्कि इसमें इंडियन बैंक और पंजाब एंड सिंध बैंक से जुड़े करोड़ों रुपये के लेनदेन, कैश क्रेडिट लिमिट, कथित फर्जी दस्तावेज, संदिग्ध आरटीजीएस ट्रांजेक्शन और बैंकिंग प्रक्रियाओं में संभावित अनियमितताओं जैसे गंभीर पहलू शामिल हैं। संगठन ने कहा कि यदि मामले की निष्पक्ष और व्यापक जांच नहीं हुई तो जनता का बैंकिंग व्यवस्था पर विश्वास प्रभावित हो सकता है।

ज्ञापन में कहा गया कि थाना सुनगढ़ी में दर्ज एफआईआर संख्या 0368/2026 में शिकायतकर्ता मोहम्मद जीशान द्वारा इंडियन बैंक के तत्कालीन शाखा प्रबंधक अमित वर्मा सहित अन्य संबंधित व्यक्तियों पर गंभीर आरोप लगाए गए हैं। मीडिया रिपोर्टों के अनुसार भी इस प्रकरण में करोड़ों रुपये की कथित हेराफेरी, फर्जी हस्ताक्षरों और बैंक खातों के दुरुपयोग के आरोप सामने आए हैं तथा मामले की पुलिस जांच जारी है। ([The Times of India][1]) हिन्दू महासभा ने कहा कि शिकायत में लगभग 19 करोड़ रुपये की कैश क्रेडिट लिमिट से जुड़े दस्तावेजों में कथित फर्जी हस्ताक्षरों, बैंक रिकॉर्ड में हेरफेर और बिना वैध अनुमति के वित्तीय लेनदेन किए जाने के आरोप दर्ज हैं, जिनकी सत्यता केवल विशेषज्ञ जांच से ही स्पष्ट हो सकती है।

संगठन के अनुसार एफआईआर में लगभग 13.61 करोड़ रुपये के आरटीजीएस लेनदेन, करीब 7 करोड़ रुपये के अंतरण तथा लगभग 13.20 करोड़ रुपये की कथित नकद निकासी जैसे गंभीर वित्तीय आरोप लगाए गए हैं। ज्ञापन में कहा गया कि इतने बड़े स्तर पर हुए कथित लेनदेन की जांच केवल सामान्य पुलिस विवेचना तक सीमित नहीं रहनी चाहिए, बल्कि बैंकिंग विशेषज्ञों, डिजिटल फॉरेंसिक विशेषज्ञों और वित्तीय जांच एजेंसियों को भी इसमें शामिल किया जाना चाहिए। हिन्दू महासभा ने मांग की कि दोनों बैंकों में कैश क्रेडिट लिमिट स्वीकृत करने की पूरी प्रक्रिया, ऋण स्वीकृति फाइलें, केवाईसी दस्तावेज, गारंटी रिकॉर्ड, बैंक अधिकारियों की नोटिंग तथा संबंधित सभी अभिलेखों की गहन जांच कराई जाए।

ज्ञापन में यह भी मांग की गई कि कथित हस्ताक्षरों का हैंडराइटिंग एवं फॉरेंसिक परीक्षण कराया जाए और बैंक में उपलब्ध पुराने मूल अभिलेखों से उनका वैज्ञानिक मिलान किया जाए। इसके अलावा आरटीजीएस ट्रांजेक्शन किस अधिकारी के लॉगिन अथवा प्रमाणीकरण से हुए, इसकी जांच की जाए। संगठन ने कहा कि संबंधित बैंक शाखाओं के सीसीटीवी फुटेज, कैशियर रिकॉर्ड, वाउचर, चेक, सर्वर लॉग, आईपी रिकॉर्ड तथा अन्य डिजिटल साक्ष्यों को तत्काल सुरक्षित कराया जाना चाहिए ताकि जांच के दौरान कोई महत्वपूर्ण प्रमाण नष्ट न हो सके।

हिन्दू महासभा ने आरोप लगाया कि यदि करोड़ों रुपये की धनराशि वास्तव में अनियमित तरीके से निकाली या स्थानांतरित की गई है तो यह केवल व्यक्तिगत धोखाधड़ी का मामला नहीं बल्कि बैंकिंग व्यवस्था की गंभीर विफलता और संभावित मिलीभगत का विषय हो सकता है। संगठन ने मांग की कि कथित लेनदेन से प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रूप से लाभ प्राप्त करने वाले सभी खातों और व्यक्तियों की पहचान कर धनराशि के अंतिम गंतव्य का पता लगाया जाए। साथ ही दोनों बैंकों के संबंधित शाखा प्रबंधकों, कर्मचारियों, खाताधारकों, गारंटरों और अन्य संबंधित व्यक्तियों की भूमिका का निष्पक्ष परीक्षण किया जाए।

जिलाध्यक्ष पंडित पंकज शर्मा ने कहा कि हिन्दू महासभा किसी व्यक्ति विशेष को दोषी घोषित नहीं कर रही है और न ही किसी निष्कर्ष पर पहुंच रही है, बल्कि करोड़ों रुपये से जुड़े इस गंभीर प्रकरण की सच्चाई सामने लाने के लिए स्वतंत्र एवं निष्पक्ष जांच की मांग कर रही है। उन्होंने कहा कि जांच साक्ष्यों, बैंक रिकॉर्ड और वैज्ञानिक परीक्षणों के आधार पर होनी चाहिए ताकि किसी निर्दोष व्यक्ति के साथ अन्याय न हो और वास्तविक दोषी भी कानून के शिकंजे से बच न सकें।

ज्ञापन में जिलाधिकारी से अनुरोध किया गया कि मामले की गंभीरता को देखते हुए सीबीआई अथवा किसी अन्य स्वतंत्र उच्चस्तरीय एजेंसी से जांच कराए जाने के लिए शासन को संस्तुति भेजी जाए, वर्तमान विवेचना की प्रगति की उच्च स्तर पर समीक्षा कराई जाए तथा जांच पूरी होने तक सभी बैंकिंग और डिजिटल अभिलेखों को सुरक्षित रखने के निर्देश दिए जाएं।

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