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लाखों की लागत से बना खेल मैदान, बिना उपकरणों के कैसे निखरेगी ग्रामीण युवाओं की प्रतिभा

बरखेड़ा/पीलीभीत। ग्रामीण अंचल के होनहार खिलाड़ियों और युवाओं की प्रतिभा को निखारने के सरकारी दावे धरातल पर दम तोड़ते नजर आ रहे हैं। क्षेत्र के ग्राम पंचायत पचपेड़ा पुखा में लाखों रुपए की सरकारी धनराशि खर्च कर बनाया गया खेल मैदान आज अपनी दुर्दशा पर आंसू बहा रहा है। वित्तीय वर्ष 2022-23 में निर्मित इस खेल मैदान का मुख्य द्वार तो बड़े-बड़े नारों और चमकीले रंगों से सँवार दिया गया, लेकिन इसके अंदर की हकीकत बेहद चौंकाने वाली और निराशाजनक है। निर्माण कार्य पूरा होने के लंबा समय बीत जाने के बाद भी इस मैदान में आज तक युवाओं के व्यायाम करने या खेलकूद के लिए आवश्यक बुनियादी उपकरण तक नहीं लग पाए हैं। शासन की मंशा थी कि गांवों में खेल मैदान और ओपन जिम विकसित कर ग्रामीण युवाओं को सेना, पुलिस और खेल जगत में करियर बनाने के लिए एक बेहतर मंच प्रदान किया जाए। इसी उद्देश्य के तहत पचपेड़ा पुखा में इस खेल मैदान का निर्माण कराया गया था। शुरुआती दिनों में ग्रामीणों और युवाओं में इसे लेकर भारी उत्साह था कि अब उन्हें अभ्यास के लिए दूर नहीं जाना पड़ेगा। लेकिन जिम्मेदार अधिकारियों और जनप्रतिनिधियों की घोर उदासीनता के कारण यह मैदान महज एक शोपीस बनकर रह गया है। वर्तमान में पूरा मैदान देखरेख के अभाव में जंगली झाड़ियों और घास-फूस से पट चुका है, जिससे यहाँ अभ्यास करना तो दूर, कदम रखना भी दूभर हो गया है।स्थानीय युवाओं का कहना है कि मैदान का ढांचा तैयार होने के बाद उन्हें उम्मीद थी कि जल्द ही यहाँ ओपन जिम के उपकरण, रनिंग ट्रैक और अन्य खेल सामग्रियां उपलब्ध कराई जाएंगी। लंबे इंतजार के बाद भी जब ग्राउंड के भीतर कोई काम नहीं हुआ, तो युवाओं की उम्मीदें टूटने लगीं। हालत यह है कि व्यायाम के उपकरणों के अभाव में गाँव के प्रतिभावान युवाओं को मजबूरन सड़कों के किनारे या असुरक्षित स्थानों पर दौड़ लगानी पड़ रही है, जिससे हमेशा किसी हादसे की आशंका बनी रहती है। ग्रामीणों का आरोप है कि सरकारी बजट को ठिकाने लगाने के लिए आनन-फानन में आधा-अधूरा निर्माण कराकर छोड़ दिया गया, लेकिन इसके वास्तविक उपयोग को लेकर कोई गंभीर प्रयास नहीं किए गए। खेल मैदान की इस बदहाली से न सिर्फ सरकार की महत्वाकांक्षी योजना को बट्टा लग रहा है, बल्कि क्षेत्र के सैकड़ों युवाओं का भविष्य भी अंधकार में डूब रहा है। अब देखना यह है कि जिम्मेदार विभाग इस गंभीर समस्या का संज्ञान लेकर कब तक कुंभकर्णी नींद से जागता है।

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