उज्जैन की शाही मस्जिद के ध्वस्तीकरण पर बवाल, पुलिस ने दागे आंसू गैस के गोले, मौलाना शहाबुद्दीन ने जताई कड़ी आपत्ति
बरेली: मध्य प्रदेश के उज्जैन में स्थित ऐतिहासिक शाही मस्जिद को ढहाए जाने को लेकर भारी बवाल मच गया है। ध्वस्तीकरण की इस कार्रवाई के दौरान मुस्लिम समाज के ही दो गुट आमने-सामने आ गए, जिसके बाद हालात को काबू में करने के लिए पुलिस को आंसू गैस के गोले दागने पड़े। इस पूरी घटना पर ऑल इंडिया मुस्लिम जमात के राष्ट्रीय अध्यक्ष मौलाना शहाबुद्दीन बरेलवी ने सख्त नाराजगी जताते हुए अपनी तीखी प्रतिक्रिया दी है।
क्या है पूरा मामला?
जानकारी के मुताबिक, उज्जैन की ऐतिहासिक शाही मस्जिद को मुस्लिम समाज के ही कुछ लोग खुद तोड़ रहे थे। वहीं, समाज का ही एक दूसरा गुट इस ध्वस्तीकरण का कड़ा विरोध करने लगा। देखते ही देखते विरोध ने उग्र रूप ले लिया। स्थिति को बिगड़ता देख मौके पर मौजूद पुलिस को हस्तक्षेप करना पड़ा और उपद्रवियों को तितर-बितर करने के लिए पुलिसकर्मियों ने आंसू गैस के गोले दागे।
मौलाना शहाबुद्दीन बरेलवी ने की कड़ी निंदा
इस मामले में ऑल इंडिया मुस्लिम जमात के राष्ट्रीय अध्यक्ष मौलाना शहाबुद्दीन बरेलवी ने कड़ा रुख अख्तियार किया है। उन्होंने संसद में पारित ‘उपासना स्थल अधिनियम’ (Places of Worship Act) का हवाला देते हुए कहा कि संसद में यह साफ तौर पर तय किया गया है कि देश में आजादी से पूर्व की बनी हुई जितनी भी मस्जिदें या धार्मिक स्थल हैं, उनकी यथास्थिति (Status Quo) कायम रहेगी। बाबरी मस्जिद के अलावा किसी भी अन्य मस्जिद पर ध्वस्तीकरण की कार्रवाई नहीं की जाएगी।
संसद के फैसले को किया जा रहा दरकिनार
मौलाना शहाबुद्दीन ने आरोप लगाया कि संसद के स्पष्ट निर्णय और बिल को दरकिनार करते हुए देश में लगातार मस्जिदों को निशाना बनाया जा रहा है। उन्होंने कहा कि देश में 100 साल से भी ज्यादा पुरानी मस्जिदों को शहीद किया जा रहा है।
उन्होंने हालिया घटनाओं का जिक्र करते हुए कहा, “चाहे वह सहारनपुर की मस्जिद का मामला हो या देश के अन्य हिस्सों का, और अब उज्जैन की शाही मस्जिद को भी तोड़ने का काम किया जा रहा है।” मौलाना ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि सरकार या किसी भी प्रशासन को मस्जिदों को इस तरह शहीद करने का कोई हक नहीं है, क्योंकि कानूनन आजादी से पहले की मस्जिदों को संरक्षण प्राप्त है। इसके बावजूद देश भर में ऐसी कार्रवाइयां चिंताजनक हैं।
