श्रीमद्भागवत कथा सुन भावविभोर हुए श्रद्धालु
बरखेड़ा। क्षेत्र के गाँव मोहम्मगंज रम्पुरा स्थित मड़ी पर चल रही नौ दिवसीय श्रीमद्भागवत कथा के दूसरे दिन रविवार को दोपहर 2 बजे ,कथावाचिका राखी शास्त्री ने गोकर्ण और धुंधकारी के प्रसंग का बहुत ही सुंदर और मार्मिक वर्णन किया। कथा सुनने के लिए क्षेत्र के सैकड़ों ग्रामीण और श्रद्धालु उपस्थित रहे। कथावाचिका ने बताया कि गोकर्ण और धुंधकारी दो भाई थे। जहाँ गोकर्ण ज्ञानी, पवित्र और संत स्वभाव के थे, वहीं धुंधकारी महाक्रूर, शराबी और कुकर्मी था। बुरे कर्मों और बुरी संगत के कारण धुंधकारी की अत्यंत भयानक मृत्यु हुई, जिसके परिणामस्वरुप उसे प्रेत योनि प्राप्त हुई। अपने भाई को प्रेत योनि से मुक्ति दिलाने के लिए ज्ञानी गोकर्ण ने श्रीमद्भागवत कथा का अनुष्ठान प्रारंभ किया। कथा सुनने के लिए धुंधकारी ने सात गांठों वाले बांस का आश्रय लिया। श्रीमद्भागवत कथा के प्रभाव से धुंधकारी प्रेत योनि से पूरी तरह मुक्त हो गया। कथा के अंत में स्वयं भगवान विष्णु के दूत उसे दिव्य विमान में बैठाकर बैकुंठ लोक ले गए। इस पावन कथा के माध्यम से यह संदेश दिया गया कि श्रीमद्भागवत कथा के श्रवण से सबसे बड़े पापी और प्रेत बने जीव का भी उद्धार संभव हो जाता है।
इस धार्मिक अनुष्ठान के दौरान प्रसादी लाल, हरिशंकर, हरद्वारी लाल, रामसेवक और विवेक शर्मा सहित बड़ी संख्या में ग्रामीण मौजूद रहे, जिन्होंने कथा का रसपान कर पुण्य लाभ अर्जित किया।
