रीलबाजी का खुमार: हाईवे पर धमाके और ओवरब्रिज पर डांस, धृतराष्ट्र बनी खाकी
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रीलबाजों को सम्मानित करने वाले सफेदपोश भी मौन

पीलीभीत।सोशल मीडिया पर सस्ती लोकप्रियता, चंद लाइक्स और व्यूज बटोरने की भूख अब पीलीभीत की सड़कों पर राहगीरों के लिए काल बनती जा रही है। कंटेंट क्रिएटर्स ने हाईवे और ओवरब्रिज को अपनी बपौती और फिल्मी सेट समझ लिया है। नौगवां ओवरब्रिज पर बीच सड़क देर रात युवतियों का डांस हो या हाईवे पर गंधक-पोटाश से किए जा रहे जानलेवा धमाके। इन सब पर जिले की हाईटेक होने का दावा करने वाली पीलीभीत पुलिस की रहस्यमयी चुप्पी उसकी कार्यप्रणाली को कटघरे में खड़ा कर रही है। बड़ा सवाल यह है कि क्या खाकी को किसी बड़े सड़क हादसे और लाशों के बिछने का इंतजार है?
सोशल मीडिया पर वायरल वीडियो👇🏽
हादसों को खुली दावत, धृतराष्ट्र बनी खाकी
राष्ट्रीय राजमार्ग पर फर्राटा भरते वाहनों के बीच अचानक गंधक-पोटाश का तेज धमाका किसी भी चालक का ध्यान भटका कर पल भर में कई जिंदगियां खत्म कर सकता है। इसी तरह नौगवां ओवरब्रिज पर देर रात यातायात बाधित कर डांस की रील बनाना सीधे तौर पर कानून का खुला मखौल है। हैरत की बात यह है कि हाईवे पेट्रोलिंग, डायल 112 और सोशल मीडिया सेल चलाने वाली पुलिस को यह सब नजर नहीं आ रहा। रीलबाजों के हौसले इतने बुलंद हैं कि वे सरेआम नियम तोड़ रहे हैं और प्रशासन धृतराष्ट्र बनकर तमाशा देख रहा है।
ज्ञान बांटने वाले ठेकेदार और सम्मानित करने वाले नेता कहां हैं?
इस पूरे खेल में उन तथाकथित सामाजिक संगठनों का दोहरा चरित्र भी उजागर हो गया है, जो महिला सम्मान और मर्यादा के नाम पर मंचों से गला फाड़ते हैं, लेकिन सड़क सुरक्षा से खिलवाड़ कर रही इन घटनाओं पर उनके मुंह सिल गए हैं।
वहीं, सबसे बड़ी विडंबना उन सफेदपोश जनप्रतिनिधियों और व्यावसायिक प्रतिष्ठानों की है, जो अपनी सस्ती पब्लिसिटी के लिए इन गैर-जिम्मेदार कंटेंट क्रिएटर्स को मंच पर बुलाकर सम्मानित करते हैं। क्या समाज में सिर्फ लाखों व्यूज ही सम्मान का पैमाना रह गए हैं? क्या उन लोगों को आइकॉन बनाया जाएगा जो अपनी चंद सेकंड की रील के लिए दूसरों की जान जोखिम में डालते हैं?
रीलबाजों पर कार्यवाई की दरकार
रील बनाना निजी शौक हो सकता है, लेकिन सार्वजनिक सड़क और हाईवे को खतरे में डालकर ऐसा करने का अधिकार किसी को नहीं है। पीलीभीत पुलिस को अब अपनी कुंभकर्णी नींद से जागना ही होगा। कप्तान को चाहिए कि इन वायरल वीडियो का स्वत: संज्ञान लेकर ऐसे रीलबाजों पर सख्त धाराओं में मुकदमे दर्ज कराएं। यदि समय रहते इन पर कानूनी चाबुक नहीं चला, तो जिस दिन कोई भीषण हादसा होगा, उसकी जिम्मेदारी सिर्फ इन रीलबाजों की नहीं, बल्कि मौन साधे बैठी पुलिस की भी होगी।
